आर्कटिक अभियान

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भारत ने नॉर्वे के स्‍पिट्सबर्गन द्वीप के नि-एलिजुंड स्‍थित अंतर्राष्‍ट्रीय अनुसंधान सुविधा का प्रयोग करते हुए अगस्‍त 2007 के प्रथम सप्‍ताह में प्रथम भारतीय वैज्ञानिक अभियान की शुरूआत करते हुए आर्कटिक अनुसंधान प्रारंभ किया। तदनुसार, भारत की ओर से मुख्य रूप से हिमनद विज्ञान, हाइड्रोकेमिस्‍ट्री, सूक्ष्म जीव विज्ञान, और वायुमंडलीय विज्ञान के क्षेत्रों में अध्ययन करने के लिए हर गर्मियों और सर्दियों में वैज्ञानिक टीमों को आर्कटिक में भेजा जाता है। कुल 8 वैज्ञानिकों के लिए एक आवास और कार्य करने की जगह के साथ "हिमाद्री" स्टेशन का निर्माण किया गया और औपचारिक रूप से 1 जुलाई 2008 को इसका उद्घाटन किया गया। आर्कटिक में भारत की विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रदर्शन हेतु एक वेब आधारित पोर्टल विकसित किया गया। हिमनद विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान, भू विज्ञान और वायुमंडलीय विज्ञान के क्षेत्र में सहयोगात्‍मक वैज्ञानिक प्रयासों के लिए एनसीएओआर और एनपीआई के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे । भारत को सर्वसम्मति से नि-एलिजुंड विज्ञान प्रबंधक समिति (एनवाईएसएमएसी) के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया था। साथ ही भारत को अंतर्राष्‍ट्रीय आर्कटिक विज्ञान समिति में पर्यवेक्षक के रूप में भी आमंत्रित किया गया है।

Last Updated On 11/02/2015 - 15:25
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