वायुमंडलीय, जलवायु विज्ञान और सेवाएं

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मौसम-वैज्ञानिक सेवाएं सामान्‍यत: समाज पर महत्‍वपूर्ण प्रभाव डालती है तथा ये विशेषत: कृषक समुदाय पर खासा असर डालती हैं। वैश्‍विक जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों के कारण विभिन्‍न स्‍थानिक तथा कालिक पैमानों पर मौसम तथा जलवायु के परिशुद्ध पूर्वानुमान की जनता/निजी क्षेत्र/सरकारें मांग करती हैं। मौसम तथा जलवायु के उन्‍नत तथा विश्‍वसनीय पूर्वानुमान हेतु उच्‍च विभेदन गतिकीय मॉडलों (अर्थात् युग्‍मित महासागर-वायुमण्‍डल-जीवमण्‍डल-हिमांकमण्‍डल मॉडलों) की आवश्‍यकता होती है। इस प्रकार, एक संयुक्‍त एप्रोच, जिसमें भूमि, महासागर तथा वायुमण्‍डलीय प्रक्रियाएं शामिल हों, विभिन्‍न स्‍थानिक तथा कालिक पैमानों के पूर्वानुमान में सुधार करने की कुंजी है। दूसरी ओर, उपग्रहों सहित विभिन्‍न प्‍लेटफॉर्म आधारित प्रेक्षण प्रणालियों के जरिये विभिन्‍न मौसम प्रणालियों की गहन मॉनीटरिंग न केवल वर्तमान मौसम प्रणालियों के बारे में आवश्‍यक सूचना मुहैया कराती है, बल्‍कि संख्‍यात्‍मक मॉडलों में उनका प्रभावी सम्‍मिश्रण परिशुद्ध पूर्वानुमानों हेतु महत्‍वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। ईएसएसओ ने अपनी सभी संबंधित इकाइयों को शामिल करते हुए क्षेत्रों में व्‍यापक विकासात्‍मक कार्यक्रमों को कार्यान्‍वित करने हेतु सकारात्‍मक कदम उठाए हैं।

भारत में हुई ग्रीष्‍मकालीन मानसून वर्षा के वर्ष 1886 से लेकर अब तक के ऋतुकालिक पूर्वानुमान के रूप में जलवायुवीय सूचना उपलब्‍ध है। विशेष रूप से भारत की जलवायु संबंधित गतिविधियां यथा जलवायु मॉनीटरिंग तथा विश्‍लेषण, जलवायु डेटा प्रबंधन, जलवायु अनुसंधान तथा जलवायु पूर्वानुमान (ऋतुकालिक पूर्वानुमान), जलवायु सेवाओं हेतु महत्‍वपूर्ण पहलु हैं। प्राकृतिक जलवायु की परिवर्तनीयता को समझने के लिए यह सशक्‍त आधार तैयार करते हैं तथा जलवायु परिवर्तन के कारण उत्‍पन्‍न होने वाले विक्षोभों की तीव्रता का आकलन लगाने हेतु यह महत्‍वपूर्ण उपकरण है।             

भारत, दुनियाभर के लोगों की सुरक्षा तथा भलाई के लिए मूल प्राथमिकताओं के समर्थन हेतु अपने संसाधनों के इष्‍टतम उपयोग के जरिये जलवायु सेवाओं के लिए वैश्‍विक ढांचे के भागीदार के रूप में अपनी भूमिका को स्‍थापित करने हेतु प्रतिबद्ध है। इसे एकीकृत वैश्‍विक प्रेक्षण प्रणाली, आपदा जोखिम को कम से कम करने तथा नई सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ ही क्षमता निर्माण द्वारा प्राप्‍त किया जाएगा।

Last Updated On 05/25/2015 - 15:41
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