वायुमंडलीय विज्ञान प्रौद्योगिकी और सेवाएं/वायुमंडलीय विज्ञान

Print

मौसम संबंधी सेवाओं का समाज पर सामान्य रूप में महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। विभिन्न कालिक और स्थानिक पैमानों पर मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए सार्वजनिक / निजी / सरकारी क्षेत्रों में मांग बढ़ी है और इसका कारण वैश्विक जलवायु परिवर्तनशीलता और परिवर्तन के संभावित प्रभाव है। मौसम और जलवायु के बेहतर और विश्वसनीय पूर्वानुमान के लिए उच्च विभेदन वाले गतिशील मॉडलों की आवश्यकता है (उदाहरण के लिए युग्मित समुद्र – वायुमंडल-जैवमंडल-हिमांकमंडल मॉडल)। इस प्रकार, भूमि, महासागर और वायुमंडलीय प्रक्रियाओं को शामिल करते हुए संयुक्त दृष्टिकोण के पास ही विभिन्न कालिक और स्थानिक रेंजों पर पूर्वानुमानों में सुधार लाने की कुंजी होगी। दूसरी ओर, उपग्रहों सहित भिन्‍न प्‍लेटफार्म आधारित प्रेक्षण प्रणालियों के माध्‍यम से विभिन्‍न मौसम प्रणालियों की गहन निगरानी से न केवल वर्तमान मौसम प्रणालियों के बारे में जानकारी उपलब्‍ध होती है, बल्‍कि संख्‍यात्‍मक मॉडलों में इनके प्रभावी सम्‍मिश्रण से सटीक पूर्वानुमान हेतु महत्‍वपूर्ण मार्गदर्शन मिलता है। ईएसएसओ ने अपनी सभी घटक इकाइयों को शामिल करते हुए इन क्षेत्रों में व्यापकता विकास कार्यक्रमों के कार्यान्‍वयन के लिए सकारात्मक कदम उठाए हैं।

11 वीं योजना के दौरान एक पर्याप्त स्तर तक मौसम की भविष्यवाणी क्षमताओं का उन्नयन प्रमुख प्राथमिकता कार्यक्रमों में से एक है। इसके चार घटक हैं, अर्थात वायुमंडलीय प्रेक्षण नेटवर्क; कंप्यूटिंग सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण; डेटा एकीकरण और उत्पाद उत्‍पादन और सूचना का प्रसार। कंप्यूटिंग, एकीकरण और उत्पाद सृजन से संबंधित गतिविधियां और प्रसार पूरे हो चुके हैं। प्रेक्षण अवलोकन नेटवर्क में वृद्धि जारी है। अब आईएमडी के पास स्वचालित मौसम स्टेशन, डॉपलर मौसम रडार (डीडब्ल्यूआर) अत्याधुनिक ऊपरी वायु प्रणालियां आदि का एक नेटवर्क हैं। इन प्रेक्षणों का उपयोग अब अपने वैश्विक और क्षेत्रीय संख्‍यात्‍मक पूर्वानुमान मॉडलों को उच्च निष्पादन कम्प्यूटिंग सिस्टम (एचपीसी) पर चलाने के लिए किया जा रहा है। इससे उच्च प्रभाव वाली मौसम की घटनाओं जैसे चक्रवात, प्रचंड गरज के साथ तूफान, भारी वर्षा और बाढ़ के लिए पूर्वानुमान क्षमताओं में महत्‍वपूर्ण रूप से सुधार हुआ है ।

'वर्षा मन' परियोजना के सफल समापन से प्रचालनरत मौसम सेवाएं बहुत ही लाभान्वित हुई हैं जिसने प्रेक्षणों, संचार, विश्‍लेषणों पूर्वानुमान, प्रसार को आईएमडी आधुनिकीकरण योजना के चरण-1 के अंतर्गत देश भर में एक एकल प्रणाली के रूप में एकीकृत किया हैं।

Last Updated On 11/02/2015 - 11:04
Back to Top