वायुमंडलीय प्रौद्योगिकी केंद्र

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मौमस तथा जलवायु से संबंधित प्रेक्षणात्‍मक तथा संचार प्रौद्योगिकियों की वैश्‍विक उन्‍नति का फायदा उठा कर देश की उभरती हुई प्रेक्षणात्‍मक आवश्‍यकताओं पर पूर्णरूपेण विचार करते हुए अनन्‍य रूप से प्रौद्योगिकी से संबंधित मुद्दों के निस्‍तारण हेतु देश में कोई भी समर्पित संस्‍थान विद्यमान नहीं है। भारत के लिए अत्‍याधुनिक प्रेक्षण प्रणालियों को समेकित करने, विस्‍तार करने तथा उन्‍हें बनाए रखने के लिए, एक ऐसी अति महत्‍वपूर्ण एजेंसी की पहचान करना तथा उसे स्‍थापित करना आवश्‍यक है जो कि विभिन्‍न सरकारी विभागों, स्‍वायत्तशासी संगठनों, विश्‍वविद्यालयों तथा यहां तक कि निजी उद्यमियों के राष्‍ट्रीय तकनीकी संसाधनों/सुविधाओं को यथोचित आर एण्‍ड डी प्रयासों के माध्‍यम से आदर्श प्रौद्योगिकियों की डिजाइन और विकास के लिए साझा कर सकें; तथा सम्‍पूर्ण स्‍वदेशी प्रयासों के माध्‍यम से अन्‍ततोगत्‍वा बड़े पैमाने पर उत्‍पादन हेतु उद्योग जगत को प्रौद्योगिकी का अन्‍तरण कर सकें। भारत के लिए ऐसे समर्पित तथा संगठित प्रयास ही हमेशा के लिए गुणवत्ता पूर्वानुमान तथा पूर्व चेतावनी सेवाएं प्रदान करने लिए लागत प्रभावी तथा अत्‍याधुनिक प्रेक्षण प्रणालियां सुनिश्‍चित कर सकते हैं।

(क) लक्ष्‍य:

वायुमण्‍डलीय मापनों हेतु समकालीन उपकरण सेंसरों/संचार असेम्‍बली घटकों के विकास की दिशा में नए-नए प्रयासों के जरिये भारत में स्‍वदेशी क्षमताएं विकसित करने के अधिदेश के साथ अनन्‍य वायुमण्‍डलीय प्रौद्योगिकी केन्‍द्र की स्‍थापना।

(ख) प्रतिभागी संस्‍थान:

  1. भारत मौसम-विज्ञान विभाग, नई दिल्‍ली
  2. भारतीय उष्‍णदेशीय मौसम-विज्ञान संस्‍थान, पुणे
  3. राष्‍ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्‍थान, चेन्‍नै

(ग) कार्यान्‍वयन योजना:

राष्‍ट्रीय वायुमण्‍डलीय प्रौद्योगिकी केन्‍द्र को प्राथमिक रूप से एक ऐसे  व्‍यवहार्य संस्‍थान के निकट स्‍थापित किया जाना चाहिए जो संस्‍थान उपस्‍करणन, सेंसर प्रौद्योगिकी के स्‍वदेशी विकास, एडब्‍ल्‍यूएस, एआरजी, पीडीडब्‍ल्‍यूआर, एमपीएआर, आरएस/आरडब्‍ल्‍यू जैसी सेंसर, ऊर्जा तथा संचार उप प्रणालियों के एकीकरण, पवन प्रोफाइलरों, अन्‍तरिक्ष प्रौद्योगिकी अवयवों के क्षेत्र में प्रमाणित विशेषज्ञता वाला हो। ऐसे प्रयास निर्भरता को कम करने के दृष्‍टिकोण से रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण है तथा साथ ही ये प्रयास भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के मौसम तथा जलवायु के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों हेतु आत्‍मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए तथा वैश्‍विक प्रौद्योगिकी आयातों की कमीशनिंग की लागत को घटाने के लिए भी महत्‍वपूर्ण है। दूसरी बात यह है कि पूर्वानुमान उत्‍पादों के अनुप्रयोग के विविध क्षेत्रों हेतु विशेष रूप से निर्मित उत्‍पादों के प्रबंधन, दृश्‍यकरण, प्रोसेस तथा सृजन हेतु बहुत सारी इंटरफेसिंग की आवश्‍यकता होगी, जो कि वर्तमान में उपलब्‍ध नहीं है।

राष्‍ट्रीय वायुमण्‍डल प्रौद्योगिकी केन्‍द्र (एनसीएटी) को सेंसरों, डिजिटल मापन, संचार तथा नेटवर्किंग, प्रोसेसिंग, दृश्‍यकरण, भण्‍डारण तथा वायुमण्‍डलीय वेरिएबल की पुन: प्राप्‍ति तथा प्रसारण से संबंधित माइक्रोवेव, आईटी, ऑप्‍टो-इलैक्‍ट्रॉनिक तथा अन्‍तरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास पर ध्‍यान केन्‍द्रित करते हुए एनआईओटी जैसे सुस्‍थापित संस्‍थानों की इंक्‍यूबेशन इकाई के रूप में स्‍थापित किया जा सकता है। यह वायुमण्‍डलीय प्रेक्षण उपकरणों के बड़े पैमाने पर स्‍वदेशी निर्माण हेतु सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा निजी औद्योगिक संगठनों को प्रौद्योगिकी का अन्‍तरण भी करेगा। इस केन्‍द्र में एक वायुमण्‍डलीय प्रौद्योगिकी परामर्शदात्री परिषद होगी जिसके सदस्‍य अन्‍य सहयोगी संस्‍थानों के साथ ही आईएमडी, एनसीएमआरडब्‍लयूएफ, आईआईटीएम, एनआईओटी, जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केन्‍द्र (सीसीसीआर)  इत्‍यादि से लिए जाएंगे, इस प्रकार यह प्रमुख संस्‍थानों के साथ जुड़ा रहेगा। एनसीएटी की स्‍थापना का, देश की समस्‍त प्रेक्षण प्रौद्योगिकी विकास की आवश्‍यकताओं को पूरा करके, वायुमण्‍डलीय विज्ञान तथा सेवाओं की अपेक्षाओं के साथ सशक्‍त संयोजन रहेगा।

(घ) डेलीवरेबल्‍स:

 स्‍वदेशी तथा सेल्‍फ-सस्‍टैनिंग प्रयासों के माध्‍यम से आगामी दस वर्षों में देश के लिए उन्‍नत वायुमण्‍डलीय प्रौद्योगिकी विकास की प्रणाली बनाने की परिकल्‍पना है।

(ङ) विदेशी विनिमय घटक सहित बजट आवश्‍यकता: रु. 85 करोड़    

(रुपए करोड़ में)

बजट आवश्‍यकता

 
योजना का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
        वायुमण्‍डलीय प्रौद्योगिकी केन्‍द्र 17.00 17.00 17.00 17.00 17.00 85.00

 

Last Updated On 05/26/2015 - 10:35
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