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जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र (सीसीसीआर)

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हाल के दशकों में वैश्‍विक तापमान की बढ़ती प्रवृति ने बदलती जलवायु में वैश्‍विक जलवायु और क्षेत्रीय मानसून परिवर्तनीयता के विशिष्‍ट पहलुओं पर वैज्ञानिक समुदाय का ध्‍यान आकर्षित किया है ।

इस मुद्दे के समाधान में विभिन्न पृथ्‍वी प्रणाली के घटकों अर्थात वायुमंडल, समुद्र, जैवमंडल, जलमंडल, हिमांकमंडल के बीच होने वाली विभिन्‍न परस्‍परक्रियाओं के विस्‍तृत आकलन के साथ पृथ्‍वी प्रणाली मॉडल (ईएसएम) का अनुसंधान और विकास कार्य शामिल है । पृथ्‍वी प्रणाली मॉडल घटकों को उन्‍नत बनाने के लिए मूल अनुसंधान को सुदृढ़ बनाना और जारी रखना जरूरी है ।

क) उद्देश्‍य :

  1. क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन के कारणों और प्रक्षेपण से जुड़े वैज्ञानिक प्रश्‍नों पर ध्‍यान देने के लिए उच्‍च विभेदन जलवायु मॉडलों अथवा पृथ्‍वी प्रणाली मॉडलों (र्इएसएम) को विकसित करना ।
  2. विभिन्‍न परिदृश्‍यों के अंतर्गत भारतीय मानसून के पूर्वानुमान प्राप्‍त करने के लिए क्षेत्रीय जलवायु मॉडलों का उपयोग करना और इन पूर्वानुमानों में अनिश्‍चितताओं का आकलन करना।
  3. मानसून अंतर-वार्षिक परिवर्तनीयता के लिए क्षेत्रीय और वैश्‍विक जलवायु प्रणोदों को चिन्‍हित करते हुए मानसून परिवर्तनीयता और पूर्वानुमानीयता का अध्‍ययन करना और उपयोगी पूर्वानुमानकों और भारतीय ग्रीष्‍म मानसून वर्षा (आईएसएमआर) की शुष्‍क और आर्द्र अवधियों की गतिशीलता और इनसो के साथ इनके संबंध और अन्‍य वैश्‍विक युग्‍मित परिघटना को समझना ।
  4. उच्‍च विभेदन प्रॉक्‍सियों से प्राप्‍त जलवायु पुननिर्माण पर आधारित क्षेत्रीय मानसून जलवायु परिवर्तन की प्रमुख विशेषताओं का दस्‍तावेजीकरण करना और एशियाई क्षेत्र पर दीर्घ – अवधि मानसून जलवायु परिवर्तनीयता को समझना ।
  5. दक्षिण-एशियाई मानसून प्रणाली पर विशेष रूप से जोर देते हुए क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन के विज्ञान से संबंधित सभी मुद्दों पर ध्‍यान देने के लिए वैश्‍विक और क्षेत्रीय जलवायु मॉडलिंग में आंतरिक क्षमता निर्माण करना ।
  6. प्रभाव आकलनों के लिए विश्‍वसनीय जलवायु इन्‍पुट सृजित करना ।
  7. उपग्रह आधारित डेटा का उपयोग करते हुए रन ऑफ के वृहत्-पैमाने अनुमान और मृदा नमी के लिए जल वैज्ञानिक मॉडल को विकसित करना ।
  8. मानसून अंतर वार्षिक परिवर्तनीयता में भारतीय क्षेत्र पर ऐरोसाल भार की भूमिका को समझना और भारतीय मानसून में इसके संभावित प्रभाव ।
  9. विकिरण प्रणोदन और क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन में ऐरोसोल रसायन विज्ञान (जैविक और अजैविक आयनीय प्रजातियां) की भूमिका का अध्‍ययन करना और समझना ।

(ख) प्रतिभागी संस्‍थान :

भारतीय उष्‍णदेशीय मौसम विज्ञान संस्‍थान, पुणे

(ग) कार्यान्‍वयन योजना :

यह एक सतत् स्‍कीम है । उद्देश्‍यों की प्राप्‍ति के लिए निम्‍नलिखित प्रमुख गतिविधियां जारी रहेगी:

  1. अन्‍य दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ-साथ देश के विभिन्‍न भागों से ट्री-रिंग कालनुक्रमिकों को विकसित करते हुए विद्यमान ट्री-रिंग डेटा नेटवर्क को बढ़ाया जाएगा ।
  2. ‘मानसून प्रणाली की आंतरिक परिवर्तनीयता’ के लिए उत्‍तरदायी भौतिक प्रक्रियाओं को प्रकट करना ।
  3. एशियाई मानसून क्षेत्र में विभिन्‍न जलवायु मॉडल प्रणालियों और डेटा–मॉडल तुलना का अध्‍ययन करते हुए मानसून प्रणाली की समझ को उन्‍नत बनाना ।
  4. एआर 5 परिदृश्‍य पूर्वानुमानों के आधार पर 20 वीं सदी (1890-2005) और भावी जलवायु (2005-2100) के दौरान दक्षिण एशियाई मानसून के उच्‍च विभेदन (35 किमी ग्रिड आकार) अनुरुपणों को सृजित करना । मॉडल आउटपुटों का उपयोग प्रभाव आकलन अध्‍ययनों (उदा. जलवायु, जल संसाधनों, कृषि, स्‍वास्‍थ्‍य आदि पर प्रभाव) के लिए किया जाएगा ।
  5. पृथ्‍वी के पर्यावरण में भौतिकी, रसायनिक, विकिरण, गतिशील और जीव वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के बीच फीड़बैकों और युग्‍मित प्रक्रियाओं को समझना और जलवायु मॉडलिंग और प्रेक्षणात्‍मक तकनीकों उदा. उपकरणों और हाल के वर्षों के दौरान अर्जित और कार्य संचालन में लगाई गई स्‍वस्‍थाने सुविधाओं का उपयोग करते हुए व्‍यापक अध्‍ययन करना ।
  6. पृथ्‍वी प्रणाली मॉडल (ईएसएम) को पूर्णत: विकसित, परीक्षित और कार्यान्‍वित किया जाएगा । ईएसएम का उपयोग करते हुए कई दीर्घ मॉडल परीक्षण किए जांएगे और सीसीसीआर औपचारिक रूप से अगले युग्‍मित मॉडल अंतर-तुलनात्‍मक परियोजना (सीएमआईपी 6) में भागीदारी करेगा और आईपीसीसीएआर 6 आकलन में योगदान देगा ।
  7. भारत गांगेय मैदान और पर्वतीय क्षेत्रों के विशेष संदर्भ के साथ भारत के ऊपर ब्‍लैक कॉर्बन और वायु प्रदूषकों में क्षोभमंडलीय ऊर्ध्‍वाधर वितरण की मॉनीटरिंग द्वारा रासायनिक घटकों से प्राप्‍त विकिरण प्रणोदन को समझना ।
  8. मानसून पर्यावरण में वृहत स्‍तर बादल प्रणालियों की संघटना में ऐरोसोल, बादल प्रक्रियाओं और वृहत स्‍तर गतिशीलता के बीच परस्‍पर क्रिया को समझना तथा मॉनीटर करना ।
  9. भंडारण एवं आवश्‍यक अवसंरचना के साथ आईआईटीएम स्‍थित विद्यमान उच्‍च कार्य निष्‍पादन कम्‍प्‍यूटर प्रणाली को अपग्रेड करना ।
  10. प्रत्‍येक समय पैमाने पर भारतीय मानसून परिवर्तनीयता के लिए उत्‍तरदायी भौतिक कार्यप्रणाली का निर्माण किया जाएगा ।
  11. जीएचजी में दीर्घ-अवधि परिवर्तनों को समझने के लिए भारतीय-स्‍टेशनों पर वायुमंडलीय जीएचजी सकेंद्रता की मॉनीटरिंग और जीएचजी परिवर्तनों को प्रभावित करने वाले मानवजनित और प्राकृतिक प्रक्रियाओं को समझना । विभिन्‍न पर्यावरणों में जीएचजी फ्लक्‍स की दीर्घ-अवधि मॉनीटरिंग के लिए जीएचजी फ्लक्‍स टॉवरों के नेटवर्क को स्‍थापित करना ।

(घ) डेलीवरेबल्‍स :

  1. एक पृथ्‍वी प्रणाली मॉडल (ईएसएम) जिसमें पृथ्‍वी प्रणाली के विभिन्‍न घटकों के बीच होने वाली सभी पारस्‍परिक प्रक्रियाओं का वास्‍तविक और व्‍यापक प्रतिनिधित्‍व हो । ईएसएम की सख्‍ती से जांच की जाएगी और वैश्‍विक जलवायु, भारतीय और एशियाई मानसून, युग्‍मित जलवायु परिघटना जैसे इनसो, आईओड़ी, प्रशांत और अंटलांटिक दशकीय परिवर्तनीयता आदि के अनुरुपण के साथ वैधीकृत किया जाएगा ।
  2. विभिन्‍न जलवायु परिदृश्‍यों के लिए 2100 तक भावी मानसून जलवायु का उच्‍च विभेदन पूर्वानुमान । इसका उपयोग विभिन्‍न प्रभाव आकलन अध्‍ययनों (उदा. जलवायु, जल संसाधन, कृषि, स्‍वास्‍थ्‍य आदि) के लिए किया जाएगा ।
  3. प्राकृतिक और मानव जनित प्रभावों के प्रति प्रेक्षित जलवायु परिवर्तनों का पता लगाने, समझने और कारणों के लिए जानकारी आधार को सृजित करना ।
  4. जलवायु परिवर्तन से संबंधित सभी वैज्ञानिक मुद्दों पर ध्‍यान देने के लिए आवश्‍यक पृथ्‍वी प्रणाली और जलवायु मॉडलिंग के क्षेत्र में देश में जनक्षमता विकसित करना ।
  5. स्‍वस्‍थान मापों द्वारा भारतीय क्षेत्र के ऊपर जीएचजी सकेंद्रित परिवर्तनीयता के बारे में प्रेक्षणों को सृजित करना ।
  6. भारतीय स्‍टेशनों के ऊपर जीएचजी फ्लक्‍सों के प्रेक्षणों को सृजित करना और जीएचजी के स्रोतों और सिंक्‍स को चिन्‍हित करना ।
  7. स्‍वस्‍थाने मापों द्वारा भारतीय मानसून क्षेत्र के ऊपर बादल और ऐरोसोल परस्‍पर क्रियाओं के बारे में प्रेक्षण सृजित करना ।
  8. जलवायु प्रॉक्‍सियों (उदा. ट्री रिंग्‍स, कोरल, स्‍पिलीयोथर्म, आदि) के स्‍थिर आइसोटोप विश्‍लेषण के माध्‍यम से विगत मानसून जलवायु परिवर्तनीयता की प्रॉक्‍सियां सृजित करना ।

बजट आवश्‍यकता – रू. 100 करोड़

(रू. करोड़ में)

बजट आवश्‍यकता
स्‍कीम का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र 25.00 22.00 20.00 18.00 15.00 100.00

 

Last Updated On 02/18/2015 - 16:20
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