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तटीय परिसंचरण, तलछट ट्रांसपोर्ट और तटरेखा परिवर्तन

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समुद्र तट प्राकृतिक प्रक्रियाओं और मानव निर्मित गतिविधियों के कारण कई भू-रूपात्मक परिवर्तन के अधीन है। तटरेखा बदलाव भारतीय तट सहित कई इलाकों में गंभीर समस्याओं में से एक हैं। समुद्री तटरेखा में कमी होने से तट की हानि होती है और इसके परिणामस्वरूप समुद्र तट को नुकसान होता है जो तटीय समुदायों के लिए खतरा है। भारतीय तट के मामले में तटीय क्षेत्रों में तटरेखा परिवर्तन और तटीय क्षेत्र में तलछट पैटर्न के रुझान को समझना बहुत महत्वपूर्ण है, जो कि घनी आबादी वाला है और यहां तट के साथ-साथ बहुत सारी विकासात्मक गतिविधियां की जाती हैं। इसलिए, तटीय रेखा परिवर्तन में पूर्ववर्ती और वर्तमान प्रवृति और निकट तटीय परिसंरचण पैटर्न के संबंध में सटीक सूचना की मांग में वृद्धि हो रही है। तट के साथ-साथ तलछट की मौसमी गतिशीलता के साथ-साथ इस तरह की सूचना कटाव के कारण, नौवहन चैनल, ब्रेक वॉटर, घाटों जैटियों को डिजाइन करने और तलकर्षण सामग्री आदि के लिए निपटान हेतु भूमि पर निर्णय लेने में उपयोगी होगी। 

यह कार्यक्रम चुनिंदा स्‍थानों पर प्रेक्षणों का उपयोग करते हुए तटीय रेखा की विशिष्‍टता और प्रदर्शनात्‍मक प्रयोजनों के लिए चयनित स्‍थानों पर तटीय रेखा को स्‍थिर करने के उद्देश्‍य से तैयार किया गया।

क) उद्देश्‍य

  1. वार्षिक तौर पर तटरेखा परिवर्तन का आकलन करना और मॉडलिंग का उपयोग कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में तलछट परिवहन के मौसमी पैटर्न प्रदान करने के लिए तटीय जलों में तटीय परिसंचरण और तलछट परिवहन प्रक्रियाओं को समझना।
  2. चुनिंदा स्थलों पर भारतीय तट सहित समुद्र तट परिवहन और विस्तृत माप की विशेषताएं
  3. संपूर्ण देश को कवर करने के लिए तटीय तलछट गतिकी के लिए एटलस के रूप में एक डेटाबेस का विकास करना।
  4. तटीय भू-आकृति विज्ञान पर तलछट परिवहन के परिवर्तन के प्रभाव का आकलन

ख) प्रतिभागी संस्‍थान

  1. राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै।
  2. एकीकृत तटीय एवं समुद्री क्षेत्र प्रबंधन परियोजना निदेशालय, चेन्नै।

ग) कार्यान्‍वयन योजना:

  1. तटरेखा-परिवर्तन मानचित्रों को सृजित करने के लिए उपग्रह डेटा और क्षेत्र सत्यापन के उपयोग द्वारा तटरेखा परिवर्तन का आकलन (इकमाम)
  2. भारतीय तट के साथ 3-4 क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय तटीय परिसंचरण मॉडल की स्थापना। (इकमाम और एनआईओटी)
  3. माध्यमिक डेटा और तटवर्ती पर्यावरण अवलोकनों और तलछट परिवहन दर प्रकोष्‍ठ वार / क्षेत्र वार के आकलन के उपयोग द्वारा मॉडलिंग तलछट परिवहन (इकमाम और एनआईओटी)
  4. एटलस के रूप में तलछट परिवहन पर डेटा बेस का विकास (एनआईओटी)
  5. प्राथमिकता ज्वारीय क्रीक और मुहानों में से इनलेट स्थिरीकरण उपायों से संबंधित पानी की गुणवत्ता (एनआईओटी)
  6. रेत के टीलों पर तलछट परिवहन के बदलाव के प्रभाव पर स्थान विशिष्ट अध्ययन।

परियोजना एनआईओटी और इकमाम पीडी द्वारा संयुक्त रूप से कार्यान्वित की जाएगी। भाग लेने वाले संस्थानों के बीच अतिव्‍यप्ति से बचने के लिए कार्य के विभाजन के संकेत हेतु एक साझा परियोजना दस्तावेज़ तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, तलछट परिवहन अध्ययनों में सहयोग करने के लिए एनआईओटी, इकमाम और अन्य संस्थाओं जैसे एनआईओ, सीईएसएस, एनआईटी, विश्वविद्यालयों आदि को शामिल करते हुए एक अंतर-संस्थागत कार्य समूह का गठन किया जाएगा। एक क्षेत्र व्यापक परियोजना होने के नाते, अवलोकन प्रयासों को कम करने के लिए और बेहतर प्रबंधन  के लिए देश के विभिन्न स्थानों पर संगठनों को शामिल करना वांछनीय होगा।

तटरेखा प्रबंधन के मुद्दों के प्रबंधन में तटीय इंजीनियरिंग समुदाय के उपयोग के लिए वर्तमान में देश में एक उपयुक्त स्वरूपित डेटाबेस में ज्वार गेज नेटवर्क, एचएफ रडार, पोर्ट निगरानी प्रणाली, एलईओ अवलोकनों आदि जैसी विभिन्न अवलोकन योजनाओं के डेटा को एकीकृत करने हेतु पहल प्रारंभ की जाएगी।

घ) वितरण योग्‍य :

  1. संपूर्ण देश के लिए 1:25000 और चयनित स्‍थानों तथा वार्षिक नक्‍शे / आवधिक तटरेखा बदलावों के लिए 1:5000 पैमाने में एक जीआईएस आधारित डेटाबेस तटरेखा परिवर्तन मानचित्र।
  2. तलछट आवागमन की दिशा पर स्थान-वार जानकारी और मौसम के अनुसार तलछट बजट के आकलन और भारतीय तट के साथ तलछट परिवहन के लिए एक एटलस।
  3. पानी गुणवत्ता नियंत्रण कार्यक्रम के एक भाग के रूप में बेहतरीन अनुकरण प्राप्त करने के लिए ज्वारीय इनलेट प्रबंधन पर सिफारिशें।
  4. तलछट परिवहन प्रक्रियाओं के परिवर्तन कारण के लिए रेत के टीलों में बदलाव

ङ) बजट: 65 करोड़ (3.6.6 में प्रक्षेपित)

(करोड़ रु. में)

बजट आवश्यकता
योजना का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
तटरेखा प्रबंधन 15 18 13 10 9 65

 

Last Updated On 06/16/2015 - 16:13
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