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अंटार्कटिका में तीसरे अनुसंधान स्टे शन का निर्माण

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लार्समेन पर्वतों के वातावरण में पूर्व निर्माण कार्य के लिए कार्रवाई पूरी कर ली गई है। सभी भारी अर्थमूविंग / निर्माण सामग्री और कार्गो को जहाज से तट तक दो हेलीकाप्टरों द्वारा या तेजी से बर्फ हटाने वाले वाहनों द्वारा  ले जाया गया। लैंडिंग साइट से लेकर हेलिपैड तक लगभग 250 मीटर लंबी सड़क भी खोदी गई थी। चरण II से संबंधित निर्माण गतिविधियां 2011 के दक्षिणी ग्रीष्‍म के दौरान शुरू करने के लिए निर्धारित की गई हैं।

क) उद्देश्‍य:

  1. अनुसंधान बेस को शुरू करना
  2. प्रयोगशालाओं की स्थापना
  3. अपेक्षित संचार सुविधाओं की स्थापना
  4. नए भारतीय बेस से वैज्ञानिक अध्ययनों की शुरूआत।

ख) प्रतिभागी संस्‍थाएं :

राष्‍ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र, गोवा

ग) कार्यान्‍वयन योजना:

नए स्‍टेशन के निर्माण और कमिशनिंग का कार्य दो चरणों में किया जा रहा है। निर्माण का पहला चरण जिसे वैश्विक निविदा के आधार पर चुने गए सेवाप्रदाता के माध्‍यम से किया गया था और इसे 2010 की दक्षिणी ग्रीष्‍म के दौरान पूरा किया गया। समवर्ती रूप से, एनसीएओआर में दूसरे चरण की गतिविधियां शुरू की गई थी। उसी प्रक्रिया को अपनाकर, पहले चरण के समान, वैश्विक बोली के माध्‍यम से सेवाप्रदाता चुना गया था। दूसरे चरण से संबंधित गतिविधियां 2011 के दक्षिणी ग्रीष्‍म के दौरान शुरू की जानी है। इस स्‍टेशन का 2012 में अधिग्रहण किया जाएगा, किन्‍तु पानी की आपूर्ति के लिए आरओ प्रणाली, जेहटी का निर्माण और स्‍टेशन पर आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों को लगाने की सुविधाएं चरणबद्ध रूप से की जाएंगी। संचार और डेटा ग्रहण करने के एंटीना का निर्माण, आधुनिक चिकित्‍सा व्‍यवस्‍था की स्‍थापना एवं सौर विद्युत उत्‍पादन प्रणालियां और मेटलैब का कार्य भी किया जाएगा।

घ) वितरण योग्‍य:

रहने के स्‍थान और प्रयोगशाला सुविधाओं के साथ लार्समेन पर्वत स्‍थित पूरे वर्ष कार्यरत अत्‍याधुनिक अनुसंधान बेस ‘भारतीय’ को जब राष्‍ट्र को समर्पित किया जाएगा, वह ध्रुवीय कार्यक्रमों में भारत की उपस्थिति और गतिविधियों को बढ़ाएगा। इस सब-एरोरल क्षेत्र से प्राप्‍त आंकड़े मैत्री के आंकड़ों को पूरकता प्रदान करेंगे और कुल मिलाकर मानसून से ध्रुवीय मौसम के दूर संपर्क स्‍थापित करने के वैज्ञानिक प्रयास को सहायता देंगे। चूंकि अंटार्कटिका में भारती स्‍टेशन का स्‍थान पूर्व दरार अवधि के दौरान भारत के पूर्वी घाट मोबाइल बेल्‍ट से जुड़े हुए क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व करता है, इस स्‍टेशन पर तुलनात्‍मक पर्पटीय विकास का अध्‍ययन करने का उत्‍कृष्‍ट अवसर मिल सकेगा। खुले समुद्र के पास होने के कारण इस स्‍टेशन से समुद्री वैज्ञानिक क्षेत्रों के अध्‍ययन की सुविधा मिलेगी,  जो  एक ऐसा क्षेत्र है जिसे मैत्री द्वारा कवर नहीं किया जा सकता है। यह स्टेशन ऑस्‍ट्रेलिया, चीन, रूस और रोमानिया के बहुत पास होने के कारण इन एससीएआर राष्‍ट्रों के साथ वैज्ञानिक सहयोग करने में सक्षम होगा।

ङ) बजट की आवश्‍यकता : 149 करोड़ रु.

(करोड़ रु. में)

बजट आवश्‍यकता
योजना का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
तीसरे स्टेशन का निर्माण 31.00 25.00 28.00 31.00 34.00 149.00

 

Last Updated On 06/17/2015 - 10:19
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