विस्तामरित महाद्वीपीय शेल्फर की बाहरी सीमाओं का सीमाकंन

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संयुक्त राष्ट्र समुद्र विधि कन्वेंशन के तहत, प्रत्‍येक तटीय राष्‍ट्र के पास अपनी तटीय रेखा (सीमावर्ती अथवा विपरीत तटीय राष्‍ट्र के साथ समुद्री सीमा) से 200 समुद्री मील की दूरी तक महाद्वीपीय शैल्‍फ का संप्रभु अधिकार है। यह सीमा अब 350 समुद्री मील की दूरी तक बढ़ा दी गई है, यदि कुछ मानदंड पूरे किए जाते हैं। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पश्चिमी अपतटीय क्षेत्रों सहित अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में महाद्वीपीय शेल्फ की बाहरी सीमाओं का सीमांकन करने के लिए अपेक्षित वैज्ञानिक तथा तकनीकी सूचना को एकत्रित करने, प्रसंस्‍करित करने, विश्‍लेषण तथा दस्‍तावेजी करणी के लिए एक प्रमुख बहु संस्‍थागत राष्‍ट्रीय कार्यक्रम पूरा किया जा चुका है।

11 मई 2009 को अनुच्‍छेद 76 के प्रावधान के तहत, महाद्वीपीय शैल्‍फ की सीमा पर बने संयुक्‍त राष्‍ट्र आयोग के समक्ष एक विस्‍तारित महाद्वीप शैल्‍फ (~0.6 मिलीयन वर्ग किमी.) के लिए प्रथम आंशिक दावा प्रस्‍तुत किया गया। 16 अगस्त 2010 को, सचिव, एमओईएस के नेतृत्व में एक छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयार्क में महाद्वीपीय शेल्फ की सीमा पर बने आयोग के समक्ष भारत के दावे पर औपचारिक प्रस्तुति पेश की। समझौता वक्तव्य के प्रावधानों के तहत, विस्तारित शेल्फ के दूसरे भाग के लिए एक दूसरी आंशिक प्रस्तुति (~ 0.6 मिलियन वर्ग कि मी), को भी अंतिम रूप दे दिया गया है और सीएलसीएस के समक्ष दाखिल करने के लिए विदेश मंत्रालय को उपलब्ध कराया गया।

एक संरचित डेटा बेस में भूवैज्ञानिक डेटा के अत्‍याधुनिक अभिलेख तथा पुर्न प्राप्‍ति सुविधाओं के साथ एक राष्‍ट्रीय समुद्री भू भौतिकी डेटा केन्‍द्र स्‍थापित किया गया। इस डेटा केंद्र ने परियोजना - जी 2 जी श्रेणी के तहत कम्प्यूटर सोसायटी ऑफ भारत- निहीलेंट-शासन पुरस्कार 2010 जीता।

Last Updated On 11/02/2015 - 15:40
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