ईएसएसओ

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पृथ्‍वी प्रणाली विज्ञान संगठन (ईएसएसओ), नई दिल्‍ली, पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) की नीतियों और कार्यक्रमों के लिए कार्यकारी शाखा के रुप में कार्य करता है । ईएसएसओ, केंद्रों/यूनिटों को संपूर्ण निर्देश उपलब्‍ध करवाता है और कार्यक्रमों के कार्यान्‍वयन की समीक्षा करता है । ईएसएसओ को अक्‍तूबर 2007 में एक वर्चुअल संगठन के रुप मे स्‍थापित किया गया, जिसके अंतर्गत पृथ्‍वी के विभिन्‍न घटकों अर्थात् वायुमंडल, समुद्र, हिमांकमंडल और भू विज्ञान के बीच सुदृढ़ युग्‍मिता के महत्‍व को मान्‍यता देते हुए, सभी मौसम वैज्ञानिक और समुद्री विकास गतिविधियों को एक छत्र के नीचे लाया गया । इसमें पृथ्‍वी विज्ञान की चार प्रमुख शाखाएं है यथा (i) समुद्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (ii) वायुमंडलीय और जलवायु विज्ञान और (iii) भू विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और (iv) ध्रुवीय विज्ञान और हिमांकमंडल । इस प्रयास का एकमात्र उद्देश्‍य पृथ्‍वी प्रणाली की परिवर्तनीयता को समझने के लिए पृथ्‍वी प्रक्रियाओं से संबंधित विभिन्‍न पहलुओं पर समग्र रुप से ध्‍यान देना है।

ईएसएसओ का मुख्‍य लक्ष्‍य जलवायु परिवर्तन विज्ञान और जलवायु सेवाओं से संबंधित पहलुओं पर ध्‍यान देने सहित सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों के लिए मौसम, जलवायु और आपदा संबंधित परिघटनाओं का पूर्वानुमान देने के लिए क्षमता में विकास और सुधार करना है । ईएसएसओ समुद्री पर्यावरण के क्षेत्र में होने वाले वैश्‍विक विकासों को ध्‍यान में रखते हुए समाज के सामाजिक-आर्थिक लाभ के लिए धारणीय तरीके से समुद्री संसाधनों के अन्‍वेषण और दोहन के लिए प्रौद्योगिकी के विकास के लिए भी उत्तरदायी है । ईएसएसओ के अधिदेश में से एक में, अंटार्कटिक और आर्कटिक दोनों क्षेत्रों के ध्रुवीय विज्ञान में अनुसंधान को बढ़ावा देना है, ताकि वैश्‍विक जलवायु और मौसम, विशेष रुप से हिंद महासागर पर, इन क्षेत्रों की विभिन्‍न परिघटनाओं और प्रक्रियाओं को समझा जा सके ।

ईएसएसओ के समग्र विजन में भारतीय उपमहाद्वीप और हिंद महासागर क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक लाभ के लिए पृथ्‍वी प्रणाली विज्ञान के क्षेत्र में जानकारी और प्रौद्योगिकी उद्यम में उत्‍कृष्‍टता लाना है । इसके तीन प्रमुख घटक है :

  • विशेष रुप से भारतीय उपमहाद्वीप और सीमावर्ती समुद्रों के साथ-साथ ध्रुवीय क्षेत्र के संदर्भ के साथ, वायुमंडल, जलमंडल, हिमांकमंडल और भूमंडल को मिलाकर संपूर्ण रुप में पृथ्‍वी प्रणाली विज्ञान में शैक्षणिक और अनुप्रयुक्‍त दोनों अनुसंधान करने के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  • अच्‍छी तरह से एकीकृत कार्यक्रमों के माध्‍यम से देश को तूफान मर्होमि, भूकंप, सुनामी और अन्‍य परिघटना जैसी प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी सहित मानसून और अन्‍य मौसम/जलवायु पैरामीटरों, समुद्र स्‍थिति के पूर्वानुमान में सर्वाधिक संभावित सेवाएं उपलब्‍ध करवाना।
  • समुद्री संसाधनों (सजीव और निर्जीव) के अन्‍वेषण और दोहन के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास को सहायता देते हुए इनका धारणीय उपयोग सुनिश्‍चित करना।

इन नीतियों/कार्यक्रमों को इसके निम्‍नलिखित केंद्रों के माध्‍यम से संचालित किया जाता है:

  1. समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्‍थितिकी केंद्र (सीएमएलआरई)
  2. एकीकृत तटीय एवं समुद्री क्षेत्र प्रबंधन (इकमाम)
  3. राष्‍ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस)
  4. राष्‍ट्रीय मध्‍यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआर डब्‍ल्‍यूएफ)
  5.  भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी)
  6. राष्‍ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्‍थान (एनआईओटी)
  7. भारतीय राष्‍ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (इंकॉइस)
  8. राष्‍ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (एनसीएओआर)
  9. भारतीय उष्‍णदेशीय मौसम विज्ञान संस्‍थान (आईआईटीएम)
  10. राष्‍ट्रीय पृथ्‍वी विज्ञान अध्‍ययन केंद्र (एनसेस)

ईएसएसओ के फ्रेमवर्क के अंतर्गत, विभिन्‍न कार्यक्रमों की अर्द्ध-वार्षिक आधार पर समीक्षा तथा निगरानी करने हेतु एक सु-व्‍यवस्‍थित तंत्र स्‍थापित किया गया है जो सामान्‍यत: अप्रैल तथा अक्‍तूबर माह में आयोजित किए जाते हैं। इस समीक्षा तंत्र का प्राथमिक उद्देश्‍य वार्षिक योजना के लिए प्रस्‍ताव तैयार करना तथा, यदि आवश्‍यक हो तो, मिड कोर्स करेक्‍शन करना है ।

Last Updated On 08/06/2015 - 11:21
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