भूकंप मॉनीटरिंग, पूर्वानुमान और प्रशमन

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भूकंप  मॉनीटरिंग: कम से कम संभावित समय के भीतर भूकंप के पैरामीटरों का अनुमान लगाने हेतु भूकंप की मॉनीटरिंग के लिए सत्रह ब्रॉड बैंड स्टेशनों वाले एक वास्तविक समय भूकंपीय मॉनीटरिंग नेटवर्क को स्थापित किया गया है। महत्‍वपूर्ण भूकंपों का स्‍वत: निर्धारण किया जाता है तथा नेटवर्क में विन्‍यासित भारतीय एवं वैश्‍विक भूकंपीय स्‍टेशनों का प्रयोग करते हुए 15 मिनटों के भीतर प्रथम सूचना को भेजा जाता है । भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में वास्तविक समय में मॉनीटरिंग और भूकंपीय गतिविधि की रिपोर्टिंग करने के लिए वी सेट आधारित 20-स्टेशन वाले भूकंपीय टेलीमेटरी नेटवर्क को स्थापित किया गया है। इलेक्‍ट्रॉनिक रूप में ऐतिहासिक महत्‍व वाले भूकंपीय एनॉलॉग चार्टों की स्‍कैनिंग, वेक्‍टर डिजीटाइजेशन और व्‍यवस्‍थित पुरालेख हेतु सुविधाएं स्‍थापित की गई है।  

भूकंप पूर्व संकेतक अध्‍ययन:पिछले दो दशकों के दौरान, भारत न केवल हिमालयी क्षेत्र में आए मध्‍यम से लेकर बडे परिमाण वाले भूकंपों से प्रभावित हुआ है अपितु प्रायद्वीप शील्‍ड क्षेत्र में आए भूकंपों से भी प्रभावित हुआ है। देश में व्‍यापक तरीके से महत्‍वपूर्ण भूकंप विवृतनिकी पर्यावरण में विभिन्‍न भूकंप पूर्व संकेतक परिघटना के सृजन, सम्‍मिश्रण तथा विश्‍लेषण हेतु एकीकृत एप्रोच को अपनाने के लिए भूकंप-पूर्व संकेतक पर राष्‍ट्रीय कार्यक्रम (एनपीईपी) आरंभ किया गया था। इसके भाग के रुप में, विभिन्‍न भूकंप पूर्व संकेतक परिघटना जैसे कि भूकंपीय पैर्टनों, पर्पटीय विरुपण, गुरुता विसंगतियां, इलेक्‍ट्रिकल चालकता परिवर्तन, इलेक्‍ट्रो मैगेनेटिक गड़बड़ी, जल स्‍तर में परिवर्तन, भू-जल रासायनिक परिवर्तन, रेडॉन तथा हीलियम विसंगतियां, तथा तापीय विसंगतियों आदि को मॉनीटर करने के लिए घुट्टू, शिलांग तथा कोयना में बहु पैरामीट्रिक भू भौतिकी वेधशालाओं (एमपीजीओ) की स्‍थापना की गई।  इन डेटा सेटों के प्रारंभिक विश्लेषण ने कोयना-वरना क्षेत्र में चल रही विवर्तनिक प्रक्रियाओं पर उपयोगी सुराग प्रदान किया है जिससे इस क्षेत्र में भूकंप के अल्पकालिक पूर्वानुमान जारी करने में मदद मिली है। घुट्टू में, विभिन्न भूभौतिकीय डेटा श्रृंखलाओं का भूकंप पूर्व संकेतों की संभावित पहचान के लिए विश्लेषण किया जा रहा है।

माइक्रो-ज़ोनेशन अध्ययन :माइक्रोजोनेशन एक बहु विषयक और बहु संस्थागत प्रयास है जिसका प्रत्‍यक्ष अनुप्रयोग आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन, शहरी विकास, योजना, डिजाइन और निर्माण, और विद्यमान जीवन और संपत्ति, रक्षा प्रतिष्ठान, भारी उद्योग और सार्वजनिक सुविधाएं और सेवाओं आदि का जोखिम मूल्यांकन करने हेतु किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान दिल्ली, गुवाहाटी, सिक्किम और बैंगलोर के लिए माइक्रोजोनेशन अध्ययन शुरू करने के प्रयास किए गए है। 1 : 25,000 पैमाने पर गुवाहाटी, सिक्किम और बैंगलोर तथा 1 : 50,000 पैमाने पर दिल्ली का माइक्रोज़ोनेशन पूरा हो चुका है।

Last Updated On 11/19/2015 - 16:41
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