तीसरे भारतीय अंटार्कटिक अनुसंधान बेस की स्थापना | Ministry of Earth Sciences

तीसरे भारतीय अंटार्कटिक अनुसंधान बेस की स्थापना

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अप्रैल 2007 के दौरान, दिल्ली में हुई XXX अंटार्कटिक संधि परामर्शदात्री की बैठक में लार्समैन हिल्स, अंटार्कटिका में एक नए स्थायी भारतीय बेस को अनुमोदन प्रदान किया गया था। पूर्वानुमान मॉडलों जैसे कि वायु गुणवत्ता हेतु औद्योगिक स्रोत जटिल-लघु अवधि (आईएससीएसटी3), शोर पर्यावरण के लिए शोर पूर्वानुमान मॉडल (पूर्वानुमानक7810) तथा समुद्र में अपशिष्‍ट जल के निपटान पर मलिनता और छितराव अध्‍ययन के कोरमिक्‍स 6, मॉडल का उपयोग करते हुए, एक व्‍यापक प्रभावी आकलन अध्‍ययन पूरा किया गया। आधारभूत डेटा पर विचार विमर्श सहित अंतिम सीईई रिपोर्ट में अतिरिक्त डेटा और स्टेशन डिजाइन पर महत्वपूर्ण जानकारी और प्रारंभिक पर्यावरण संदर्भ को भी शामिल किया गया है ।

अभिनव विचारों के लिए वर्ष 2006-07 के दौरान रुचि की वैश्विक अभिव्यक्ति के माध्यम से स्टेशन का वैचारिक डिजाइन प्राप्त हुआ और एक सलाहकार वास्तु फर्म को नियुक्त किया गया। 2009-10 के  दक्षिणी ग्रीष्‍म के दौरान स्‍टेशन के निर्माण के लिए आवश्‍यक अवसंरचना बनाने के महत्‍वपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करते हए   पूर्व स्टेशन की आवश्यक निर्माण गतिविधियों को शुरू किया गया। सभी भारी अर्थ मूविंग/निर्माण सामग्री और काग्रो जिनका भार 5 से 47 मीट्रिक टन था, दो हेलीकॉप्‍टरों द्वारा अथवा बर्फ पर तेज दौड़ने वाले वाहनों द्वारा जहाज से किनारे पर लाया गया। लैडिंग साइट से लेकर हैलीपैड तक एक 250 मी लंबा रोड़ भी तैयार किया गया। स्‍टेशन की चरण-1 निर्माण गतिविधियों में मुख्‍य स्‍टेशन बिल्‍डिंग की नींव और गैराज सम्‍प और दीवारों के निर्माण के लिए रोआं, प्रीकॉस्‍ट कॉन्‍क्रीट पदार्थों का उपयोग करते हुए हैलीपैड का निर्माण, प्री कॉस्‍ट कॉन्‍क्रीट पदार्थों का उपयोग करते हुए ईंधन फॉर्म की नींव का निर्माण करना, ईंधन, ताजे और अपशिष्‍ट जल हेतु पाइपलाइन बिछाना, स्‍थल सर्वेक्षण और नियोजित किए गए उपग्रह ग्राउंड स्‍टेशन आदि के लिए नींव रखने का कार्य पूरा हो चुका है । 2011 के दक्षिणी ग्रीष्‍म के दौरान चरण-II की निर्माण गतिविधियां शुरु की जाएंगी ।      

Last Updated On 11/18/2015 - 14:07
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