गैस हाइड्रेट्स अन्वेनषण प्रणाली

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गैस हाइड्रेट्स, अपनी प्रचुर संसाधन क्षमता के साथ एक संभावित ईंधन संसाधन के रूप में उभर रहा है। भूवैज्ञानिक स्थिति का प्रारंभिक आकलन और उपलब्ध सीमित भूकंप डेटा से भारत के ईईजेड के भीतर गैस हाइड्रेट्स के बड़ी मात्रा में होने की उच्च संभावना का पता चलता है। विभिन्न संगठनों द्वारा एकत्र मल्टी चैनल भूकम्पीय डेटा का मूल्यांकन किया गया है और आंकड़ों के आधार पर, 100 कि मी X 100 कि मी में दो संभावित स्‍थलों की पहचान की गई और कृष्णा-गोदावरी (के जी) और महानदी बेसिनों में विस्तार से सर्वेक्षण किया गया। कुल 6660 लाइन किमी के अपरिष्‍कृत डेटा (8-12 किमी में पंक्ति रिक्ति के साथ) और 1067 किमी के परिष्‍कृत ग्रिड भूकंपीय परावर्तन डेटा (500 मीटर की पंक्ति रिक्ति के साथ) अर्जित किया गया था। इसके  अतिरिक्‍त 1055 लाइन किमी के भूकंपीय अपवर्तन डेटा अधिग्रहण के साथ 48 समुद्र तल सीस्मोमीटरों की तैनाती की गई है। भूकंप डेटा से गैस हाइड्रेट्स की जानकारी वाले तटछट प्रोफाइलों के मिलने की उम्‍मीद है। उपकरण हैंडलिंग प्रणाली और कैम गेट असेंबली से लैस एक दूर संचालित स्वायत्त कोरिंग प्रणाली (एसीएस) को 3 मीटर के प्रत्येक अनुभाग में ड्रिल करने [लगभग 100 मीटर तलछट कोर], नमूना पुनः प्राप्त करने, और गहरे समुद्र प्रचालन [3000 मीटर] में समुद्र तल पर मैंगजीन को भंडारित करने के लिए  विकसित किया गया है। आवश्यक संवेदक के साथ एक अन्‍वेषण उपकरण (आरओवी) विकसित किया गया और गैस हाइड्रेट स्थल पर एक अन्वेषण परीक्षण पूरा हो गया है। इसके अलावा, केजी बेसिन में उच्च विभेदन स्पार्कर डेटा का अधिग्रहण किया गया है।

Last Updated On 11/02/2015 - 15:52
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