जियोइंजीनियरिंग- CO2 पृथक्‍करण

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औद्योगिक क्रांति के पश्‍चात् वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्‍साइड (CO2) उत्‍सर्जन की बढ़ती दर ने ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव तथा ग्‍लोबल वॉर्मिंग पर इसके प्रभाव का अध्‍ययन करने हेतु मजबूर किया है । जनसंख्‍या में सतत् वैश्‍विक वृद्धि और आर्थिक गतिवधि ने मानवजनित कार्बनडाइऑक्‍साइड (CO2) उत्‍सर्जन में बढ़ोतरी की है और जिससे प्राकृतिक कार्बनचक्र पर दबाव पड़ना शुरू हो चुका है । इस शताब्‍दी के दौरान, वैश्‍विक कार्बन डाईऑक्‍साइड (CO2) उत्‍सर्जन की वर्तमान दर लगभग 7 जीटीसीवाई-1 से 15 जीटी सीवाई-1 अथवा 2050 तक और बढ़ने के कारण, पृथ्‍वी की जलवायु और अधिक तेजी से गर्म होने की संभावना है। 21वीं सदी के दौरान मॉडलों द्वारा दिया गया ऊष्‍णता का संभावित आकलन अलग-अलग है पर यह सारे ही वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्‍साइड के स्‍तरों के प्रति प्रतिक्रियाशील है । वायुमंडल में कार्बनडाईऑक्‍साइड की संकेद्रता प्रति वर्ष लगभग 1-2 भाग प्रति मिलीयन(पीपीएम) प्रति दर से बढ़ रही है और वर्तमान में यह 280 पीपीएम के पूर्व औद्योगिक स्‍तर से लगभग 390 पीपीएम हो गई है । वायुमंडलीय कॉर्बन डाइऑक्‍साइड की बढती संकेद्रता से ग्रीन हाउस प्रभाव, जो कि सौर ऊर्जा को ट्रैप करता है, कमज़ोर पड़ जाएगा और इसके परिणामस्‍वरूप हमारा ग्रह गर्म होगा और प्रादेशिक जलवायु में परिवर्तन आएंगे ।

 

जलवायु परिवर्तन पर यूएन कन्‍वेंशन, क्‍योटो प्रोटोकोल और वैश्‍विक जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम जैसे प्रमुख फोरम से जलवायु चक्र से छेड़छाड़ करने में मानवीय प्रभाव को नियंत्रण करने हेतु ग्रीन हाउस गैसों को नियंत्रित करने हेतु प्रशमन योजनाओं पर ध्‍यान देने में मदद मिली है । हमारे समाज को, वायुमंडलीय कॉर्बन डाईआक्‍साइड के स्‍तरों को नियंत्रित करने के लिए उपलब्‍ध विकल्‍पों और कार्बन डाईआक्‍साइड से उत्‍पन्‍न जलवायु परिवर्तन के खतरों को समझने की जरूरत है । अगर हम तब तक प्रतीक्षा करते  हैं जब तक हानिकारक जलवायु परिवर्तन का सुनिश्‍चित सबूत नहीं मिल जाता, तब तक इस समस्‍या के बड़े पैमाने पर निदान विकसित करने में काफी देर हो जाएगी । अत: प्रशमन प्रयासों पर ध्‍यान देते हुए, समुद्र में कॉर्बन-डाईआक्‍साइड पृथक्‍करण अध्‍ययन एक महत्‍वपूर्ण गतिविधि क्षेत्र है, जिस पर कई अंतर्राष्‍ट्रीय प्रयोगशालाओं में कार्य प्रगति पर है ।

(क) उद्देश्‍य

क्षमता निर्माण द्वारा समुद्र में समुद्री CO2 पृथक्‍करण तकनीकों के तंत्र को समझना; औद्योगिक स्रोतों से व्‍यावहारिक CO2 ग्रहण प्रौद्योगिकी का अध्‍ययन और स्‍थापना करना, व्‍यावहारिक क्षेत्र निष्‍पादित परिवहन प्रौद्योगिकी ग्रहण करना; और ईआईए प्रेक्षण और मॉनीटरिंग के लिए समु्द्री उपकरण को विकसित करना ।

(ख) प्रतिभागी संस्‍थान :

राष्‍ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्‍थान, चेन्‍नै

(ग) कार्यान्‍वयन योजना

वायुमंडल में CO2 उर्त्‍सजन द्वारा ग्‍लोबल वॉर्मिंग परिघटना को नियंत्रित करने हेतु समुद्री CO2 पृथक्‍करण तकनीकों को समझने के लिए अनुसंधान के इस क्षेत्र में कार्य करना शुरू करना ।

जब भी आवश्‍यकता हो, शैक्षणिक संस्‍थानों, अनुसंधान और विकास संगठनों, उद्योगों और अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग में कार्य करना प्रस्‍तावित है ।

(घ) डेलीवरेब्‍लस::

CO2 ग्रहण, परिवहन और समुद्री पृथक्‍करण प्रौद्योगिकी

(ङ)बजट आवश्‍यकता : 50 करोड रू.

(रू. करोड में)

बजट आवश्‍यकता
स्‍कीम का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
भू इंजीनयरिंग CO2 पृथक्‍करण 5 5 10 10 20 50

 

Last Updated On 02/19/2015 - 12:52
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