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पृथ्‍वी एक इंटर लिंक और स्‍व-विनियमित मंडल के रूप में कार्य करती है। इसके उप-मंडल अर्थात वायुमंडल, जलमंडल, हिमांकमंडल, भूमंडल और जैवमंडल एक साथ‍ मिलकार काम करते हैं और इनकी परस्‍पर क्रियाएं महत्‍वपूर्ण तथा जटिल होती हैं। उपमंडलों के भीतर और इनमें ऊर्जा और सामग्री का परिवहन स्‍थानीय से वैश्विक पैमाने पर विविध स्‍थानों पर और भिन्‍न-भिन्‍न समय में होता है। मौसम और जलवायु की बेहतर और विश्‍वसनीय भविष्‍यवाणी के लिए सभी भौतिक प्रक्रियाओं और उनकी जटिल उप रेखीय परस्‍पर क्रियाओं के वास्‍तविक प्रदर्शन के साथ अत्‍यधिक उच्‍च विभेदन वाले गतिशील मॉडलों के उपयोग द्वारा प्रेक्षणों का एकीकरण आवश्‍यक है। चूंकि मौसम एक निश्चित वैल्‍यू प्राब्‍लम है इसलिए प्रारंभिक स्‍थिति का सही होना भी उतना ही महत्‍वपूर्ण है जितना कि मॉडल का सही होना। अत: मौसम संबंधी भविष्‍यवाणियों के‍ लिए डेटा सम्‍मिश्रण एक महत्‍वपूर्ण घटक है। चूंकि पारंपरिक डेटा कवरेज स्‍थानिक और कालिक रूप से सीमित होती है, अत: सैटेलाइट डेटा स्‍थान और समय दोनों ही क्षेत्रों में बेहतर कवरेज प्रदान करता है। लगभग 90 प्रतिशत डेटा जो किसी विश्‍लेषण भविष्‍यवाणी प्रणाली में सम्‍मिश्रण के लिए जाता है  सैटलाइट से और शेष स्‍वस्‍थाने प्‍लेटफॉमों से प्राप्‍त होता है। इसके साथ-साथ, यह महत्‍वपूर्ण है कि मंत्रालय के विभिन्‍न कार्यक्रमों से संबंधित विभिन्‍न संख्‍यात्‍मक प्रयोगों के लिए समुचित परिकलन सुविधाएं हों। इसमें उन प्रशिक्षण विद्यालयों जहां पर उच्‍च विभेदन वाले अत्‍याधुनिक मौसम और जलवायु संबंधी संख्‍यात्‍मक मॉडलों द्वारा प्रत्‍यक्ष प्रशिक्षण दिया जाता है, की परिकलन क्षमता में वृद्धि करना, मानसून मिशन कार्यक्रमों जिसमें विभिन्‍न भौतिक प्रक्रियाओं के लिए संवेदनशीलता प्रयोग शामिल हैं, के लिए लघु, मध्‍यम और दीर्घ अवधि पैमानों पर भविष्‍यवाणी में सुधार करने हेतु अनुसंधान और विकास कार्य करना, विभिन्‍न मानदंड निर्धारक योजनाओं के प्रभाव अध्‍ययन इत्‍यादि, डेटा प्रभाव अध्‍ययन, ऐसे भविष्‍यवाणी वाले मॉडल तैयार करना जिसमें अधिक सदस्‍य हों तथा सैकड़ों वर्षों के लिए जलवायु परिवर्तन परिदृश्‍य का अधिक के निर्माण किया जा सके इत्‍यादि शामिल है। इसके साथ-साथ, यह भी अनिवार्य है कि प्रेक्षण अनुरूपण प्रयोग (ओएसई), प्रेक्षण प्रणाली अनुरूपण प्रयोग (ओएसएसई) और लक्षित प्रेक्षण प्रयोग से संबंधित अध्‍ययन किए जाए जो कि योजना बनाने वालों का प्रेक्षणों के स्‍थान और प्रकार के बारे में मार्गदर्शन कर सकते है; जो संख्‍यात्‍मक मॉडलों के‍ लिए महत्‍वपूर्ण है। तदनुसार प्रेक्षण नेटवर्क को बेहतर बनाया जा सकता है। यह एक अत्‍यधिक परिकलन सघन कार्य है। उन महत्‍वपूर्ण स्‍थानों जहां पर प्रेक्षण नेटवर्क को सुदृढ बनाया जाना आवश्‍यक है, की पहचान करने के लिए बड़ी संख्‍या में संख्‍यात्‍मक प्रयोग किए जाने की आवश्‍यकता है। अत:, यह देखा जा सकता है कि समग्र अनुसंधान कार्य में समान उच्‍च विभेदन विश्‍लेषण पूर्वानुमान मॉडल के कई संस्‍करणों का सिमुलेशन रन शामिल है, जिसका अभिप्राय है कि एचपीसी समय का प्रयोग किया गया तथा भंडारण भी कई गुना हुआ (प्रत्‍येक छात्र द्वारा सीधे-सीधे किए गए प्रयोगों की कुल संख्‍या के आधार पर)। वृहत् कालिक पैमाने (मासिक से दशक और सैकड़ों वर्षों तक) पर प्रभाव का अध्‍ययन करने के लिए तदनुसार ये सिमुलेशन रन किए जाते हैं। इसके साथ-साथ, सूक्ष्‍म पैमाने के अध्‍ययनों को समझने के लिए अत्‍यधिक उच्‍च विभेदन वाले मॉडलों को लेना होगा जो कि बादल और संबंधित प्रक्रियाओं के पैमानों का समाधान कर सकें। अत: इन सभी अध्‍ययनों के लिए न केवल उच्‍च स्‍तरीय कंप्‍यूटर भंडारण की अपितु उच्‍च परिकलन क्षमता की भी आवश्‍यकता होगी।

क) उद्देश्‍य:

  1. मानसून मिशन के मॉडलिंग कार्यकलापों, जलवायु परिवर्तन अनुसंधान और राष्‍ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र तथा संस्‍थान के अन्‍य कार्यक्रमों की आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए एमओईएस संस्‍थानों में पेटाफ्लॉप्‍स-स्‍केल एचपीसी सुविधा केन्‍द्र की स्‍थापना करना और साथ ही इस सुविधा को देश के अन्‍य समूहों के साथ बांटना।
  2. मॉडलिंग और प्रेक्षण अध्‍ययनों के आवश्‍यक व्‍यापक डेटाबेस की स्‍थापना करना, इसको अद्यतन करना और इसका अनुरक्षण करना।
  3. डेटा-प्रसंस्‍करण में सहायता देना।
  4. मॉडल में सुधार हेतु प्रोग्रामिंग और सॉफ्टवेयर संबंधी सहायता प्रदान करना।
  5. आवश्‍यक सहायक मूल संरचना यथा यूपीएस, कूलिंग सिस्‍टम, पावर और जनरेटर बैक-अप उपलब्‍ध कराते हुए सुविधा केंद्र का अनुरक्षण करना। सामुदायिक सुविधा केंद्र के लिए काफी निवेश की योजना बनानी होगी।

ख) प्रतिभागी संस्‍थाएं:

  1. भारतीय उष्‍णदेशीय मौसम विज्ञान संस्‍थान, पुणे
  2. भारत मौसम-विज्ञान विभाग, दिल्‍ली
  3. भारतीय राष्‍ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र, हैदराबाद
  4. राष्‍ट्रीय मध्‍यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र, नोएडा

ग)कार्यान्‍वयन योजना :

पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय ने विभिन्‍न एमओईएस संस्‍थानों में एचपीसीएस के अद्यतनीकरण के लिए एक नीतिगत योजना तैयार की है। एमओईएस द्वारा एमओईएस संस्‍थानों में मौजूदा एचपीसी के अद्यतनीकरण के लिए एक उच्‍च स्‍तरीय समिति का गठन किया जा चुका है और समिति ने नीतिगत योजना को सैद्धांतिक अनुमोदन भी दे दिया है। समिति का मुख्‍य उद्देश्‍य विभिन्‍न एमओईएस संस्‍थानों की एचपीसी के अद्यतनीकरण संबंधी आवश्‍यकताओं को जानना और निविदा प्रक्रिया हेतु आरएफपी प्रलेख तैयार करना है। अगली पंचवर्षीय योजना में अद्यतनीकरण हेतु निम्‍न‍‍लिखित आवश्‍यकताएं प्रस्‍तावित हैं

एमओईएस द्वारा 2011 से अगले 5 वर्षों के दौरान शुरू की गई विभिन्‍न मिशन मोड परियोजनाओं की वर्तमान और अनुमानित एचपीसी आवश्‍यकता
कार्यक्रम वर्तमान आवश्‍यकता (टीएफ में पीक) 2013 तक 2016 तक
जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र (आईआईटीएम) ~75 ~125 ~150
मानसून मिशन (आईआईटीएम/एनसीएमआरडब्‍ल्‍यूएफ)
  • ऋतुनिष्‍ठ पूर्वानुमान प्रणाली को विकसित करना।
  • सक्रिय/ब्रेक स्‍पैल की विस्‍तारित रेंज के पूर्वानुमान के लिए प्रणाली विकसित करना
  • मध्‍यम/लघु अवधि पूर्वानुमान के लिए प्रणाली विकसित करना
~125 ~170 ~230
मौसम और जलवायु विज्ञान संबंधी राष्‍ट्रीय प्रशिक्षण (आईआईटीएम) ~10 ~15 ~20
उच्‍च विभेदन वाले उष्‍ण‍कटिबन्‍धीय चक्रवात और मौसम पूर्वानुमान प्रचालन और अनुसंधान और विकास (आईआईटीएम, आईएमडी, एनसीएमआरडब्‍ल्‍यूएफ) ~70 ~100 ~180

 

Last Updated On 06/08/2015 - 11:33
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