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स्‍वास्‍थ्‍य एस्‍च्‍यूरिन और तटीय सागरों के लिए मॉनीटरन और पूर्वानुमान

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भारत के मुहाने और तटीय क्षेत्रों पर आबादी के घनत्‍व तथा आर्थिक गतिविधियों में तेजी से वृद्धि होने के कारण बहुत अधिक तनाव हो गया है। तटीय जल, मुहानों और आर्द्रभूमि से अत्‍यंत विविध और उत्‍पादक पारिस्थितिक तंत्र मिलते हैं और इस प्रकार ये मानव जाति के लिए महत्‍वपूर्ण खाद्य स्रोत हैं। घरेलू तथा औद्योगिक अपशिष्‍टों के जरिए प्रदूषण या तो कुछ स्‍थानों या बिखरे हुए स्रोतों से होता है जो उत्‍पादक मुहाने, तटीय जल और समुद्री परिवेश में पानी की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। मुहानों और तटीय जल के स्‍वस्‍थ की दीर्घ अवधि निगरानी समय समय पर किए गए सुधारात्‍मक उपायों के संबंध में प्रदूषण की स्थिति का आकलन करने के लिए अत्‍यंत अनिवार्य है। इसे ध्‍यान में रखते हुए 1991 से भारतीय तटीय क्षेत्रों में उपरोक्‍त मुद्दों को संबोधित करने के लिए तटीय महासागर निगरानी और पूर्वानुमान प्रणाली (सीओएमएपीएस) पर एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। 

क)    उद्देश्‍य

अवलोकन नेटवर्कों के माध्‍यम से मुहानों और तटीय समुद्रों की स्थिति का आकलन करना और प्रदूषण की वर्तमान स्थिति, भिन्‍नता के रुझान और भविष्‍य के लिए इनके स्‍तरों का अनुमान लगाना।

ख)    कार्यान्‍वयन योजना

  1. संबंधित क्षेत्रों में प्रदूषण के सभी ज्ञात स्रोतों (घरेलू सीवेज, औद्योगिक बहि:स्राव, सतह से बहाव आदि) के लिए आधारभूत प्रदूषक सूची बनाना।
  2. पानी की गुणवत्ता, तलछट, जैविक और सूक्ष्‍म जैविक पैरामीटरों की निगरानी।
  3. विभिन्‍न निगरानी एजेंसियों द्वारा अर्जित डेटा के बीच अनुकूलता सुनिश्चित करने के लिए अंतर प्रयोगशाला तुलनात्‍मक अभ्‍यास।
  4. समुद्री सूक्ष्‍म जीवों की पहचान और संरक्षण तथा एक संदर्भ सुविधा के रूप में कार्य करना।
  5. सीओएमएपीएस निगरानी कार्यक्रम के तहत वास्‍तविक प्रयोक्‍ताओं के लिए विभिन्‍न डेटा सेट के तैयार प्रसार हेतु संग्रह किए गए डेटा का डेटा बेस विकसित करना।
  6. भारत के तटों में चुनें गए स्‍थानों पर जमा किए गए चुनिंदा जीवों में पॉलिएरोमेटिड हाइड्रोकार्बन जैसे ऑर्गनिक यौगिकों की निगरानी।
  7. महत्‍वपूर्ण स्‍थानों पर मॉडलिंग अध्‍ययनों के माध्‍यम से चुने हुए समुद्री प्रदूषकों का पूर्वानुमान।

प्रमुख अनुसंधान और‍ विकास संस्‍थानों तथा विश्‍वविद्यालयों के समर्थन से प्रस्‍तावित अनुसंधान केंद्र द्वारा मॉडलिंग के जरिए प्रदूषकों की निगरानी और पानी की गुणवत्ता के पूर्वानुमान पर प्रस्‍तावित गतिविधियां कार्यान्वित की जाएंगी।

ग)    वितरण योग्‍य

  1. भारतीय तट पर चुने हुए मुहानों और तटीय स्‍थानों के लिए डीओ, बीओडी, पोषक तत्‍वों और बैक्‍टीरिया के स्‍तरों का पूर्वानुमान तथा आवधिक स्‍वास्‍थ्‍य बुलेटिन तैयार करना।
  2. मुहानों और तटीय परिवेश के आकलन और स्थिति पर वेब आधारित मॉडलिंग सूचना तंत्र
Last Updated On 04/27/2015 - 12:06
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