नौबंध ब्‍वॉय, ड्रिफ्टिंग ब्‍वॉय, धारा मीटर आदि

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अवलोकन प्‍लेटफॉर्म की आवश्‍यकता महासागर की स्थिति के पूर्वानुमान और मौसम के अनुमान के लिए होती है। नई प्रस्‍तावित महासागर अवलोकन प्रणालियां अधिक समृद्ध और शुद्ध समय श्रृंखला के डेटा सेट प्रदान करती है, जिन्‍हें चलनशील / दोलनशील प्‍लेटफॉर्म के साथ बनाना कठिन है। एनआईओटी को समुद्र तल के विकास या महासागर के तल पर दबाव के रिकॉर्डर तथा नौबंध ब्‍वॉयस नेटवर्क के उपयोग द्वारा समय श्रृंखला अवलोकनों का अनुभव है। विकसित की गई विशेषज्ञता और अर्जित ज्ञान इन उपकरणों के विकास में उपयोगी होगा। विकसित की गई इन प्रौद्योगिकियों से महासागर की अन्‍य गतिविधियों जैसे निगरानी को आगे बढ़ाया जाएगा और इनमें मानव रहित, नियंत्रण रहित और अपने आप चलने वाले स्‍वचालित महासागर अवलोकन तंत्र होंगे। प्रस्‍तावित प्रणालियों में निम्‍नलिखित लाभ हैं।  

  • दीर्घ अवधि, अप्राप्‍य, मल्टी पैरामीटर अवलोकन
  • प्रयोक्‍ता निर्दिष्ट सेंसर फिट
  • पानी के नीचे तार युक्‍त वेधशाला के साथ एकीकरण
  • पूरी तरह से स्वायत्त तैनाती के रूप में, स्टैंडअलोन सिस्टम
  • तटीय, महाद्वीपीय शेल्फ, और गहरे समुद्र विन्यास

क) उद्देश्‍य:

  1. नौबंध महासागर मौसम ब्‍वॉयस प्रणालियों का उपयोग करते हुए समुद्री मौसम विज्ञान और महासागर के डेटा संग्रह करना तथा आईएनसीओआईएस में डेटा का प्रसार।
  2. तल के दबाव के रिकॉर्डर (बीपीआर) गहरे समुद्र में पानी के स्‍तर के डेटा का संग्रह और सुनामी की शीघ्र चेतावनी प्रणाली के लिए आईएनसीओआईएस में डेटा का प्रसार।
  3. सेंसर और ब्‍वॉयस (महासागर का मौसम और सुनामी) प्रणालियों का अंशांकन और सत्‍यापन।
  4. भारतीय तट के साथ संस्‍थापित एचएफ राडार स्‍थलों का रखरखाव।
  5. पानी के नीचे अवलोकन प्रणालियों के प्रोटोटाइप, प्‍लेटफॉर्म और युक्तियों का विकास तथा प्रदर्शन।
  6. इनसेट संचार की स्‍थापना जो खास तौर पर महासागर अवलोकन प्रणालियों के वास्‍तविक समय संचार हेतु डिजाइन की गई है।

ख) प्रतिभागी संस्‍थान:

  1. राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नई
  2. भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र, हैदराबाद

ग) कार्यान्‍वयन योजना:

पूर्ण स्‍वचालित अवलोकन प्रणालियों के विकास का रुझान, नई अवलोकन और सूचना प्रौद्योगिकियों का उपयोग जारी रहेगा, वास्‍तविक समय और रॉ डेटा तक पहुंच में सुधार आएगा, अवलोकन प्रणाली परीक्षण बैड का उपयोग इनके बीच तुलना में किया जाएगा और अवलोकन प्‍लेटफॉर्म के समेकन हेतु नई प्रणालियों का मूल्‍यांकन और विकास तथा उनका कार्यान्‍वयन किया जाएगा और अवलोकन डेटा डिजिटल रूपों में संग्रह और संप्रेषित किए जाएंगे।

वर्तमान में इंमेर्सेट – सी टर्मिनलों का उपयोग करते हुए जहाज से तट तक के संचार किए जाते हैं। समुद्र को कवर करते हुए भारतीय उपग्रहों की अधिक बैण्‍ड विड्थ की जरूरत है जो जहाज से किनारे तक द्विमार्गीय संचार को समर्थन दे सके। इससे सामरिक संचार के लिए विदेशी उपग्रहों पर निर्भरता में कमी आएगी और साथ ही यह वाणिज्यिक नौवहन के लिए भी उपयोगी है। इस प्रकार महासागर अवलोकन प्रणालियों के लिए उपग्रह संचार स्‍वतंत्रता पूर्वक करना बहुत अधिक आवश्‍यक है।

दीर्घ अवधि आधार पर अवलोकन कार्यक्रम को जारी रखना, जैसे निरंतर डेटा प्राप्‍त करने के लिए अगले दो दशकों (बीस वर्ष की अवधि) तक प्राप्‍त करना और तकनीकी तौर पर राष्‍ट्र की सेवा करने के साथ अंतरराष्‍ट्रीय तकनीकी निकायों में भारत का प्रतिनिधित्‍व करने के लिए नौबंध ब्‍वॉयस की तैनाती और रखरखाव, भारतीय समुद्र में सेंसरों की वृद्धि की जाएगी।  

सुनामी ब्‍वॉयस और तल पर दबाव के रिकॉर्डर का रखरखाव सुनामी के शीघ्र चेतावनी तंत्र के भाग के रूप में किया गया है और भारतीय समुद्रों में अनुकूलतम सुनामी ब्‍वॉयस नेटवर्क की स्‍थापना की जानी है। 

एचएफ राडार का रखरखाव और सतही धाराओं पर एचएफ राडार से ऑनलाइन डेटा एवं भारतीय तट के साथ तरंगों का प्रसार।

निम्‍नलिखित गतिविधियां की जानी हैं :

  • सेंसर और ब्‍वॉयस के गुणवत्ता पूर्ण अंशांकन डेटा प्राप्त करना
  • नौबंध समुद्र के तल वेधशाला के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन (एमएसओ)
  • नियत अपतटीय संदर्भ प्लेटफार्म के आद्य प्रकार विकास (एफओआरपी)
  • महासागर अवलोकन प्रणाली के लिए इनसैट संचार
  • महासागर अवलोकन प्रणाली के लिए विकास और सामग्री का परीक्षण

ब्‍वॉयस, सेंसर और नौबंध प्रणालियों की खरीद भारतीय और विदेशी विक्रेताओं से उचित तरीके से की जाएगी। सुनामी ब्‍वॉयस प्रणालियों में दो इकाइयां हैं – एक सतही ब्‍वॉयस और तल के दबाव का रिकॉर्डर (बीपीआर)। बीपीआर और सतही ब्‍वॉयस के बीच संचार श्रव्‍य मोडेम के माध्‍यम से किया जाता है और सतही ब्‍वॉयस में तटीय स्‍टेशनों पर रिकॉर्ड किए गए मान संप्रेषित करने के लिए उपग्रहों का उपयोग किया जाता है। अलग अलग पुर्जों का निरीक्षण, परीक्षण, ब्‍वॉयस का समेकन एनआईओटी द्वारा निष्‍पादित किया जाएगा। इन ब्‍वॉयस प्रणालियों की रखरखाव और मरम्‍मत का कार्य ऑनबोर्ड जहाज पर तैनात करने के लिए समय समय पर समुद्री यात्राएं की जाएंगी।

बुनियादी डिजाइन और स्‍थल का चयन आंतरिक रूप से किया जाएगा। सेंसर और महत्‍वपूर्ण आवश्‍यक पुर्जों का आयात किया जाएगा। प्रणाली समेकन आंतरिक रूप से किया जाएगा। पुर्जा स्‍तर पर परीक्षण के बाद नई सेंसर परीक्षण प्रणाली और समेकन का कार्य उथले पानी में शुरूआती परीक्षण से गुजारा जाएगा। आगे चलकर निवेश और संग्रह किए गए डेटा के आधार पर प्रणाली का परीक्षण गहरे पानी में अल्‍पावधि के लिए किया जाएगा। नौबंध ब्‍वॉयस प्रणालियों के लिए नई सामग्रियों का परीक्षण और विकास अंतर संस्‍थागत परियोजना के माध्‍यम से किया जाएगा। महासागर मौसम विज्ञान सेंसरों के लिए आंतरिक अंशांकन सुविधा स्‍थापित की जाएगी। इसमें बड़ी क्षमता के निर्माण अभ्‍यास भी शामिल हैं, चूंकि इस कार्य में खास विशेषज्ञता और समर्पित जन शक्ति की जरूरत होती है। महासागर अवलोकन प्रणालियों की डिजाइन और विकास में नई अनुसंधान और विकास परियोजनाओं को भारत तथा विदेश में अंतर संस्‍थागत परियोजनाओं के तहत सहयोग के माध्‍यम से किया जाएगा।

एनआईओटी में समुद्री मोर्चा सुविधा स्‍थापना की प्रक्रिया जारी है और परीक्षण तथा अंशांकन के लिए ओओएस प्रयोगशाला की स्‍थापना करने का प्रस्‍ताव है। इस सुविधा से अन्‍य संकल्पित नए कार्यक्रमों के निष्‍पादन में मदद मिलेगी जैसे संदर्भ प्‍लेटफॉर्म, नौबंध समुद्र तल वेधशाला, नियत अपतट संदर्भ प्‍लेटफॉर्म (एफओआरपी) आदि। यह तटीय महासागर अवलोकन प्रणाली प्रयोगशाला असेंबली, डेटा प्राप्‍त करने, सेवा और भण्‍डारण तथा रखरखाव सुविधाओं के लिए एवं स्‍वदेशी रूप से विकसित उपकरणों के क्षेत्र परीक्षण के लिए भी उपयोगी होगी।  

इसरो के सहयोग से समर्पित इनसेट संचार स्‍थापित किया जाएगा।

घ)    वितरण योग्‍य

:

  1. नौबंध ब्‍वॉयस और सुनामी प्रणालियों से मौसम विज्ञान तथा महासागर पैरामीटरों पर वास्‍तविक समय डेटा
  2. पानी के नीचे अवलोकन प्रणालियां, प्‍लेटफॉर्म और युक्तियां

ड) बजट आवश्‍यकता : 386 करोड़ रु.

बजट आवश्‍यकता
योजना का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
नौबंध ब्‍वॉयस, बहते ब्‍वॉयस, करंट मीटर्स आदि 60 70 90 80 86 386

 

Last Updated On 04/27/2015 - 12:28
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