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समुद्री ऊर्जा और स्व,च्छ् जल

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लहरें, ताप ऊर्जा और समुद्री धाराएं महासागर ऊर्जा का मुख्य रूप हैं । एक उष्णकटिबंधीय देश होने के कारण भारत में सतह के पानी और गहरे समुद्र के बीच तापमान में लगातार भिन्‍नता उपलब्ध रहती है। इस ग्रेडिएंट को एक साथ बिजली और ताजा पानी उत्पन्न करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पद्धति का उपयोग करते हुए, लक्षद्वीप के कावाराती द्वीप में विलवणीकरण को सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया गया और इसका प्रदर्शन 1000 मी जल गहराई में बार्ज नौबंध और कंडेसर अस्‍वीकृत जल का प्रयोग करते हुए ऊर्जा संयंत्र में किया गया। अब तटीय मुख्य भूमि में पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी क्षमता वाले एक फ्लोटिंग अपतटीय संयंत्र का प्रयास किया जाना है। इस के लिए उद्योग की भागीदारी का अनुरोध पहले से ही किया गया है और डिजाइन के पहले चरण को लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। समुद्र धाराओं से समानांतर विद्युत दोहन की दिशा में, तरंग ऊर्जा के दोहन के लिए विद्युत मॉड्यूल की बढ़ती दक्षता और ताप ग्रेडिएंट से बिजली के टर्बाइनों का विकास करने का कार्य प्रगति पर है।

देश के सामने आने वाली बिजली और पानी की भारी कमी के कारण, इन क्षेत्रों में व्यापक अध्ययन की मांग है।

सौर अलवणीकरण पर अनुसंधान एक ऐसे स्तर तक पहुँच गया है जहां प्रदर्शन संयंत्र चुनिंदा इलाकों में स्थापित किए जा रहे हैं।

क) उद्देश्‍य:

  1. बड़े पैमाने पर फ्लोटिंग विलवणीकरण संयंत्र का कार्यान्वयन ।
  2. उत्तरी चेन्नई तापीय विद्युत संयंत्र में अपशिष्‍ट ताप का उपयोग करके निम्‍न तापमान तापीय विलवणीकरण प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए स्‍वच्‍छ जल को तैयार करना।
  3. एलटीटीडी संयंत्रों को चलाने या छोटे भार चलाने के लिए या तरंग ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने के लिए ओटीईसी / तरंग ऊर्जा की ओर टर्बाइनों का विकास।
  4. विलवणीकरण और ऊर्जा रूपांतरण के लिए ताप विनिमय जैसे घटकों पर सैद्धांतिक और प्रायोगिक अध्ययन।
  5. विद्युत लोड या छोटे द्वीपों की प्रकाश आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक फ्लोटिंग तरंग संचालित उपकरण स्थापित करना।
  6. घटकों के इष्‍टमीकरण के लिए सैद्धांतिक, प्रयोगात्मक और क्षेत्र डेटा का सृजन और अक्षय ऊर्जा की निकासी और सौर अलवणीकरण सहित मीठे पानी के व्यावसायीकरण की दिशा में समुचित अभिग्रहण। 
  7. कार्यरत द्रव, टर्बाइन, बिजली संयंत्र घटकों का चयन और ताप ग्रेडिएंट के साथ संबंधित प्रायोगिक अध्ययन।
  8. हाइड्रो काइनेटिक महासागर धारा टर्बाइन और तरंग टर्बाइनों का विकास जो भारतीय तटों पर विद्युत उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। 
  9. विश्लेषणात्मक मॉडलिंग, संख्यात्मक मॉडलिंग, प्रयोगात्मक तुलना सहित हीट एक्सचेंजर्स, टर्बाइन आदि का डिजाइन और प्रदर्शन अध्ययन।
  10. तटीय बिजली संयंत्र में औद्योगिक तथा पीने के पानी की जरूरतें पूरी करने के लिए एक बेहतर बिजली संयंत्र विलवणीकरण प्रौद्योगिकी का डिजाइन, विकास और स्थापना और कमीशनिंग।
  11. देश के तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में वाणिज्यिक कार्यान्वयन के लिए तकनीकी-किफायती सौर विलवणीकरण इकाइयों का विकास।

ख)   प्रतिभागी संस्‍थाएं :

राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै

ग)  कार्यन्‍वयन योजनाएं :

  1. कार्यशील द्रव, टर्बाइन, बिजली संयंत्र घटकों का चयन और इसके साथ संबंधित प्रायोगिक अध्ययन।
  2. भारतीय तटों के साथ-साथ विद्युत उत्पादन के लिए अनुकूल हाइड्रो काइनेटिक महासागर धारा टर्बाइनों का विकास
  3. विश्लेषणात्मक मॉडलिंग, संख्यात्मक मॉडलिंग, प्रयोगात्मक तुलना आदि सहित हीट एक्सचेंजर्स, टर्बाइन की डिजाइन और प्रदर्शन अध्ययन
  4. औद्योगिक और पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक तटीय बिजली संयंत्र में एक बेहतर बिजली संयंत्र विलवणीकरण प्रौद्योगिकी का डिजाइन, विकास और स्थापना और कमीशनिंग।
  5. देश के तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में वाणिज्यिक कार्यान्वयन के लिए तकनीकी किफायती सौर विलवणीकरण इकाइयों का विकास।
  6. विलवणीकरण के लिए ठंडे पानी के पाइप हेतु सामग्री अध्ययन
  7. बारहवीं योजना में बड़े पैमाने पर फ्लोटिंग विलवणीकरण संयंत्र का कार्यान्वयन, कमीशन और संचालन और रखरखाव शुरू किया जाएगा

तरंग ऊर्जा दोहन के लिए बिजली मॉड्यूल के प्रोटोटाइप और ताप ग्रेडिएंट से बिजली के विकासशील टर्बाइनों का डिजाइन किया जाएगा और आगामी योजना अवधि में इसे क्षेत्र में कार्यान्वित किया जाएगा ।

छोटे मॉडल के परीक्षण के बाद, यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी कि अक्षय सागर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली के उपयोग से विलवणीकरण संयंत्र चलाया जाए।

एनआईओटी द्वारा नियमित और साथ ही परियोजना मोड में कार्यक्रमों को वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति का लाभ उठाने के लागू किया जाएगा। जहां कहीं आवश्यक हो, इसमें शैक्षिक संस्थानों, अनुसंधान और विकास संगठनों के साथ सहयोग में काम करने का प्रस्ताव है।

उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ साझेदारी के माध्यम से बड़े पैमाने पर फ्लोटिंग विलवणीकरण संयंत्र स्‍थापित किया जाएगा। सौर विलवणीकरण संयंत्र आदि जैसे कार्यक्रम स्थानीय समुदायों और अधिकारियों की मदद से कार्यान्वित किए जाएंगे। परियोजनाओं की निगरानी एनआईओटी प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी।

बुनियादी सुविधाएं / प्रयोगशाला आवश्यकताएं

एनआईओटी को कई सफलताओं के कारण विलवणीकरण में बहुत अनुभव प्राप्‍त हुआ है। तथापि, बड़े पैमाने पर उत्पादन और व्यावसायीकरण के लिए, तापीय चक्र और वैक्यूम सिस्टम से संबंधित घटकों के लिए अधिक अनुकूलन आवश्यक है। जबकि वर्तमान परिसर में एक छोटी सी प्रयोगशाला है, निरंतर डेटा संग्रह संभव नहीं है, क्‍योंकि समुद्र के पानी का सतत प्रवाह संभव नहीं है। समुद्र तट पर ही प्रयोगशाला बनाने से पानी के सतत प्रवाह का लाभ मिल सकेगा। इस प्रकार इस सुविधा में विलवणीकरण अनुसंधान प्रयोगशाला स्‍थापित की जा सकेगी जिसमें ताप हस्तांतरण, दूषण, समुद्री अनुप्रयोगों के लिए कोटिंग्‍स हीट एक्सचेंजर्स के लिए नई सामग्री का विकास और निष्‍पादन आदि पर दीर्घ अवधि परीक्षण करने के लिए लगातार समुद्री जल प्राप्‍त होता रहेगा।

पवन / लहर / सौर ऊर्जा की संकर प्रणालियों पर अनुसंधान किया जाएगा। पानी में एक प्‍लेटफॉर्म पर एक पवन टरबाइन स्थापित किया जा सकता, जो अपने आप समुद्र तट सुविधा को ही बिजली आपूर्ति कर सकता है।

घ) वितरण योग्‍य :

  1. बड़े पैमाने पर फ्लोटिंग विलवणीकरण संयंत्र
  2. छोटे भार के लिए बिजली या छोटे द्वीपों पर प्रकाश आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक फ्लोटिंग तरंग संचालित डिवाइस
  3. विद्युत उत्पादन के लिए धारा टर्बाइन और तरंग टर्बाइन।

ङ) बजट की आवश्‍यकता : 365 करोड़

(करोड़ रु)

बजट आवश्‍यकता
योजना का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
ऊर्जा और स्‍वच्‍छ जल 42 69 76 80 96 365

 

Last Updated On 06/18/2015 - 11:24
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