ध्रुवीय अभियान-अंटार्कटिका

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भारत द्वारा अंटार्कटिका का महत्व तब सामने आया जब इसे वर्ष 1981 में अग्रणी रैंकिंग वैज्ञानिक अनुसंधान करने वाले स्‍थान के रूप में पहचाना गया, जब अंटार्कटिका की ओर जाने वाला प्रथम भारतीय वैज्ञानिक अभियान शुरू किया गया। तब से, भारत ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता वाली दोनों प्रकार की वैज्ञानिक परियोजनाएं की शुरु करने के साथ-साथ अंटार्कटिका के लिए वार्षिक अभियानों में जटिल रसद प्रचालनों के संपूर्ण विस्‍तार में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा वायुमंडलीय विज्ञान और मौसम विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान और हिमनद विज्ञान, जीव विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान जैसे विषयों में शुरू किए गए प्रयोगों ने सीधे तौर पर अंटार्कटिका अनुसंधान पर बनी वैज्ञानिक समिति (स्‍कार) के तत्‍वाधान में शुरू किए गए वैश्विक प्रयोगों में भी योगदान दिया है। कुछ अंटार्कटिक संधि राष्ट्रों अर्थात जर्मनी, इटली, फ्रांस, पोलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ सहयोगात्मक अध्ययन करने के लिए भारतीय अनुसंधान स्टेशन मैत्री एक प्‍लेटफॉर्म के रूप में भी कार्य कर रहा है। इसने अंटार्कटिका में कार्य करने के लिए मलेशिया, कोलंबिया, पेरू और मॉरीशस के वैज्ञानिकों को भी मदद प्रदान की है।

अंटार्कटिका  में भारतीय वैज्ञानिक समुदाय की उल्लेखनीय उपलब्धियों में से कुछ हैं:

  1. अंटार्कटिका  के ठंडे पर्यावास से बैक्टीरिया की नई प्रजातियों की पहचान - अब तक खोजी गई 240 नई प्रजातियों में से 30 भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गई हैं।
  2. कम तापमान पर बैक्टीरिया के अस्तित्व के लिए आवश्‍यक जीन हेतु बैक्टीरिया से नए जीनों की पहचान।
  3. जैव प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए उपयोगी अनेक लाइपेस और कम तापमान पर सक्रिय प्रोटिएजों की पहचान।
  4. सिचमार्चर मरुद्वीप के व्यापक भूवैज्ञानिक और भू रूपात्मक नक्शों की तैयारी ।
  5. अंटार्कटिका  के कठोर वातावरण में मनुष्य की ठंड अनुकूलन क्षमता का अध्ययन करना, जो हिमालय में सेवारत भारत के सशस्त्र बलों पर इस प्रकार के अध्ययन के लिए उपयोग में महत्वपूर्ण आधारभूत डेटा उपलब्ध कराते हैं।

क) उद्देश्‍य :

  1. अंटार्कटिका में वायुमंडलीय विज्ञान, जलवायु परिवर्तन, भू-विज्ञान और हिमनद विज्ञान, मानव मनोविज्ञान और चिकित्सा, ध्रुवीय जीव विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिक कार्यक्रमों को जारी रखना।
  2. ध्रुवीय विज्ञान, के सीमांत स्थानों में नए कार्यक्रमों की शुरुआत, यथा आर्कटिक और अंटार्कटिक में माइक्रोबियल विविधता का आकलन: पूर्व और वर्तमान; अंटार्कटिक संधि-प्रणाली और इसके शासन के संबंध में भारतीय अंटार्कटिक स्‍टेशनों की पर्यावरणीय मॉडलिंग और पुष्‍टि; अंटार्कटिक पर वर्षा की दीर्घ अवधि मॉनीटरिंग और मॉडलिंग; और हिमनदों पर विशेष ध्‍यान देते हुए अंटार्कटिक समुद्री हिम और भू हिम स्‍थलाकृति की उपग्रह आधारित मॉनीटरिंग।
  3. अंटार्कटिक तटीय जल से पुरा-जलवायु पुनर्निर्माण सहित ध्रुवीय विज्ञान के कुछ सीमांत स्थानों में वैज्ञानिक अनुसंधान प्रारंभ करने के माध्यम से अंटार्कटिका  में भारत की प्रमुख निरंतर उपस्थिति सुनिश्‍चित करना ।
  4. अंटार्कटिका में निरंतर उपस्थिति के साथ राष्ट्रों के बीच एक प्रमुख भूमिका निभाना।

ख) प्रतिभागी संस्‍थाएं :

राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केन्द्र, गोवा

ग) कार्यान्‍वयन योजना :

पिछले वर्षों के समान, मंत्रालय की ओर से एनसीएओआर द्वारा अंटार्कटिक को भेजे जाने वाले भारतीय वैज्ञानिक अभियानों से संबंधित योजना, समन्‍वय और वैज्ञानिक और रसद पहलुओं के कार्यान्वयन से संबंधित सभी पहलुओं का ध्‍यान रखा जाएगा। ध्रुवीय क्षेत्र में सतत हित के साथ सभी प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों, प्रयोगशालाओं और विश्‍वविद्यालयों से वैज्ञानिकों की भागीदारी के साथ कार्य कार्यक्रम का विज्ञान घटक एक बहु संस्थागत राष्ट्रीय प्रयास होगा।

घ) वितरण योग्‍य :

अंटार्कटिक में भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे प्रस्‍ताविक वैज्ञानिक अध्‍ययन से जलवायु परिवर्तन परिघटना को समझने में वैश्‍विक समुदाय के जारी प्रयासों में काफी योगदान मिलेगा। इसके अतिरिक्‍त अध्‍ययन विविध किन्‍तु परस्‍पर संबंधित क्षेत्रों जैसे कि पृथ्‍वी विज्ञान, जीव विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान और जलवायु विज्ञान में प्रचुर जानकारी उपलब्‍ध करवाएंगे।

ङ) बजट की आवश्‍यकता : 733.00 करोड़ रुपए

(करोड़ रु. में)

बजट आवश्‍यकता
योजना का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
ध्रुवीय अभियान - अंटार्कटिका 153.00 155.00 140.00 142.00 143.00 733.00

 

Last Updated On 06/18/2015 - 12:43
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