ध्रुवीय क्षेत्र में आर एंड डी

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ध्रुवीय जीव विज्ञानी अध्ययन : लार्समेन पर्वत और श्रीमार्चर मरुद्वीप, अंटार्कटिका से प्राप्‍त हिम और बर्फ में जीवाणु विविधता और अनुकूलन क्षमता का अध्ययन शुरू किया गया है।लगभग 105 असतत बैक्टीरियल कॉलोनियां अलग और शुद्ध की गई थीं। ठंडे पर्यावरण के प्रति अनुकूलन क्षमता को समझने के लिए पृथकों को 40 डिग्री सेल्सियस पर विकास हेतु रखा गया था। श्रीमार्चर मरुद्वीप से प्राप्‍त 26 पृथकों और लार्समेन हिल्स क्षेत्र से प्राप्‍त 50 पृथकों में 40 डिग्री सेल्सियस पर वृद्धि देखी गई। पृथकों की प्रोटीन प्रोफाइलिंग  14.4 केडीए से 97.4 केडीए की सीमा में की गई थी। प्रोटीन प्रोफाइल की समानता के आधार पर 55 पृथकों को सूचीबद्ध किया गया और उनका 16 एस आरडीएनए विश्लेषण किया गया। पृथकों में बेसिलस फ्लेक्‍सस, बी थुरिंनजेनेसिस, बी सेरियस और बी आर्य भट्ट की प्रमुखता रही।

मीजोफिलिक सी सेलुलैंस प्रकार के जीव से स्पष्ट रूप से अलग भौतिक लक्षणों के साथ लार्समेन हिल्स के हिम निक्षेपों से प्राप्‍त सेलुलो सिमिक्रोबियम सेलुलैंस बैक्टीरिया के अलगाव पर पहली रिपोर्ट यह प्रकट करती है कि अब तक की जानकारी की तुलना में यह जीनस उम्‍मीद से अधिक महानगरीय हो सकते है और अत्यधिक ठंड के वातावरण में रहने हेतु सक्षम हो सकते है। कार्बन उपयोगिता अध्‍ययन से यह स्‍पष्‍ट होता है कि सी सेलुलैंस आसान की अपेक्षा अधिक जटिल कार्बन सबस्‍ट्रेट को वरीयता देता है जिससे यह पता चलता है कि यह हिम में कार्बन ग्रहण में एक संभावित भूमिका निभा सकता है।

तटीय लार्समेन हिल्स (पूर्वी अंटार्कटिका) से प्राप्‍त हिम के जैव भू वैज्ञानिक और सूक्ष्मजीव  विज्ञानी अध्ययन से पता चलता है कि हिम कैप बर्फ में पोषक तत्वों की सांद्रता में वृद्धि से हिम में सूक्ष्म शैवाल के विकास और तदनुसार ब्रोमो-कार्बन के उत्‍पादन को बढ़ावा मिलता है जिससे बर्फ में उच्‍च ब्रोमाइड सांद्रता बढ़ती है। अंटार्कटिक वायुमंडल में सक्रिय ब्रोमाइड की ओजोन के साथ क्रिया से तदनुसार डीएमएस ऑक्‍सीकरण से ब्रोमीन ऑक्‍साइड में वृद्धि और सल्‍फर ऐरोसाल का उत्‍पादन होगा। चूंकि ब्रोमीन ऑक्‍साइड पर आधारित डीएमएस ऑक्सीकरण ओएच / नाइट्रेट पाथवे की तुलना में बहुत तेजी से होता है, अंटार्कटिका में ब्रोमाइड की वृद्धि ओजोन की तुलना में बादल संघनन नाभिक(सीसीएन) के निर्माण में अधिक योगदान कर सकती है।

ध्रुवीय पर्यावरणीय अध्ययन : लार्समेन पर्वत, अंटार्कटिक में नए भारतीय अनुसंधान स्टेशन का व्‍यापक पर्यावरणीय मूल्‍यांकन (सीईई) किया गया तथा नई दिल्ली में हुई XXX एटीसीएम (2007) में प्रस्‍तुत किया गया ।

ध्रुवीय सुदूर-संवेदी : बेहद सटीक भूमि आधारित जीपीएस मापों, उपग्रह व्युत्पन्न लेजर एलिमेंटरी (जीएलएएस/आईसीईसैट) और रडार सैट अंटार्कटिक मानचित्रण परियोजना (रैंप) डीईएम आधारित बिंदु ऊंचाई डेटा का उपयोग करके सह क्रियात्‍मक रूप से लार्समेन हिल्स क्षेत्र (अंटार्कटिका की पूर्वी सीमा पर) का एक उन्‍नत डिजिटल एलिवेशन मॉडल  (डीईएम) सृजित किया गया । हिम ऊँचाई में परिवर्तन को मॉडल करने और हिम मात्रा संतुलन पर ध्‍यान देने के लिए एक डीईएम आवश्‍यक है।

एससीएआर अध्‍येतावृत्ति योजना के तहत, फरवरी से अप्रैल 2010 के बीच लेमोंट डोहर्टी पृथ्वी वेधशाला, कोलंबिया में उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर प्रक्रियाओं, हिंद महासागर द्विध्रुवीय (आईओडी) और समुद्री बर्फ के बीच संपर्क का अध्‍ययन किया गया। सबसे उल्‍लेखनीय सह संबंध तब प्राप्‍त किया गया जब बर्फ सांद्रता विसंगतियां द्विध्रुव सूचकांक से 2 वर्ष कम थी और जब बर्फ सांद्रता विसंगतियों से डीएमआई में एक वर्ष की बढ़ोतरी हो गई। इन परस्पर संबंधों के लिए कारणों की जांच की जा रही है।

Last Updated On 11/18/2015 - 12:00
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