लघु अवधि जलवायु पूर्वानुमान और परिवर्तनशीलता

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हमारे देश के लिए भारतीय ग्रीष्‍म मानसून वर्षा (आईएसएमआर) का ऋतुकालिक पूर्वानुमान विशेष रूप, कृषि उत्‍पादन और जल संसाधनों के प्रबंधन हेतु नीतियों की योजना बनाने के लिए महत्‍वपूर्ण है । गतिशील मॉडलों द्वारा मानसून का ऋतुकालिक पूर्वानुमान इस तथ्‍य पर आधारित है कि उष्‍णदेशों में समुद्र सतह तापमान (एसएसटी), मृदा नमी, बर्फ कवर आदि जैसी धीमी गति से घटती-बढ़ती सीमा स्‍थितियां, ऋतुकालिक समय-पैमाने पर, वायुमंडलीय विकास पर महत्‍वपूर्ण प्रभाव डालती है । हालांकि ऋतुकालिक मध्‍य मानसून का संभावित रूप से पूर्वानुमेय प्रतीत होती हैं, तथापि वायुमंडलीय जीसीएम अनुरुपणों ने मानसून वर्षा के अंतर-वार्षिक परिवर्तनों को ग्रहण करने में पर्याप्‍त कौशल नहीं दर्शाया है । मानसून के पूर्वानुमानीयता पर किए गए पर्याप्‍त अनुसंधान से यह सिद्ध होता है कि भारतीय ग्रीष्‍म मानसून की पूर्वानुमानीयता की संभावना सीमित है । इस बात का भी पता चला है कि मानसून की संभावित पूर्वानुमानीयता को निर्धारित करने में समुद्र-वायुमंडल युग्‍मिता अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण है । अत: मानसून का पूर्वानुमान देने के लिए एक युग्‍मित समुद्र-वायुमंडल जलवायु मॉडल की आवश्‍यकता होगी ।

भारतीय ग्रीष्‍म मानसून ऋतु में सक्रिय (सामान्‍य वर्षा से ऊपर) और प्रांरभ (सामान्‍य वर्षा से नीचे) काल अवधियां होती है । बारंबार अथवा दीर्घ व्‍यावधानों से सूखे की स्‍थितियां उत्‍पन्‍न होती है । कृषि फसलों का नाजुक विकास अवधियों में लंबे व्‍यावधानों से काफी हद तक उपज घटती है । वर्ष 1972, 1979 और 1987 के दौरान ऐसे ही लंबे व्‍यावधानों के कारण भारत में चावल का कम उत्‍पादन हुआ । अत: दो से तीन सप्‍ताह पहले, कृषि आयोजना (बोना; काटना आदि) और जल प्रबंधन के लिए मानसून की सक्रिय और प्रारंभ अवधियों का पूर्वानुमान, ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण हो जाता हैं । अत: विस्‍तारित अवधि समय पैमाने पर आगामी मानसून ऋतु में सक्रिय प्रारंभ अवधियों के पूर्वानुमान के लिए सांख्‍यिकी और गतिशील पद्धतियों के आधार पर तकनीकों को विकसित करने की आवश्‍यकता है। मानसून अंतर-ऋतुकालिक दोलन का पूर्वानुमान, अंतर्राष्‍ट्रीय और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर में एक प्रमुख अनुसंधान कार्यक्रम है ।

(क) उद्देश्‍य:

  1. मानसून के ऋतुकालिक पूर्वानुमान के लिए प्रणाली को विकसित करना तथा उन्‍नत बनाना ।
  2. सक्रिय/प्रारंभ अवधि के विस्‍तारित अवधि पूर्वानुमान के लिए प्रणाली को विकसित करना और उन्‍नत बनाना ।
  3. पूर्वानुमान को उन्‍नत बनाने के लिए उष्‍णदेशीय जलवायु प्रणाली की परिवर्तनीयता और पूर्वानुमानीयता पर मूल अनुसंधान प्रारंभ करना ।

(ख) प्रतिभागी संस्‍थान:

भारतीय उष्‍णदेशीय मौसम-विज्ञान संस्‍थान, पुणे

(ग) कार्यान्‍वयन योजना:

यह एक सतत् योजना है । उद्देश्‍यों की प्राप्‍ति के लिए निम्‍नलिखित प्रमुख गतिविधियां जारी रहेंगी:

  1. सीएफएस युग्‍मित मॉडल के आधार पर भारतीय मॉडल को विकसित करना और उपयोगी रेंज हेतु मॉडल द्वारा ऋतुकालिक पूर्वानुमान के कौशल को उन्‍नत बनाना।
  2. जब भी आवश्‍यकता हो, मॉडल की पैरामीटराईजेशन स्‍कीमों में सुधार करते हुए भारतीय मानसून पर ग्रीष्‍म (एसडब्‍ल्‍यू) और शीत (एनई) मानसून दोनों के लिए पूर्वानुमान कौशल में सुधार लाना तथा प्रणाली में विभिन्‍न माड्यूलों को बदलना । जैसे ही मॉडल को पर्याप्‍त रूप से आईआईटीएम में स्‍थापित कर दिया जाएगा, इसे इसके उपयोग हेतु कुछ आईएमडी वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण देने के पश्‍चात्, इसे धीरे-धीरे आईएमडी को (भारतीय मानसून के प्रचालनात्‍मक पूर्वानुमान के लिए) हस्‍तांतरित किया जाएगा ।
  3. मानसून पूर्वानुमान के कौशल को उन्‍नत बनाने के लिए बहु-मॉडल समष्‍टिगत (एमएमई) प्रणाली विकसित करना ।
  4. मानसून के सक्रिय और प्रारंभिक चरणों के पूर्वानुमान कौशलों में सुधार लाने के लिए विद्यमान प्रयोगसिद्ध मॉडलों में सुधार के साथ-साथ नई प्रयोगसिद्ध तकनीकें विकसित करना । विस्‍तारित अवधि पूर्वानुमान आदि के लिए युग्‍मित जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली (सीएफएस) के पूर्वानुमान कौशलों का मूल्‍याकंन, वैधीकरण और सुधार करना तथा प्रयोगसिद्ध और गतिशील दोनों मॉडलों का उपयोग करते हुए वास्‍तविक समय में पूर्वानुमान का प्रसारण करना । इस पकार से इस कार्यक्रम को जारी रखना तर्क सम्‍मत है ।
  5. क्षेत्रीय रासायनिक मॉडल के परिशुद्ध वैधीकरण उपलब्‍ध करवाने के लिए क्षेत्रीय मॉडल डोमेन के भीतर प्रदूषण मॉनीटरिंग स्‍टेशनों और पूर्वानुमान प्रणाली की स्‍थापना करना ।
  6. प्रत्‍येक समय पैमाने पर भारतीय मानसून परिवर्तनीयता के लिए उत्‍तरदायी भौतिक कार्यप्रणाली का निर्माण किया जाएगा ।
  7. अन्‍य दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ-साथ देश के विभिन्‍न भागों से ट्री-रिंग कालनुक्रमिकों को विकसित करते हुए विद्यमान ट्री-रिंग डेटा नेटवर्क को बढ़ाया जाएगा ।
  8. विभिन्‍न पृष्‍ठभूमि मौसम वैज्ञानिक स्‍थितियों के तहत बादलों और ऐरोसोल के विकास का पर्यवेक्षण करने के लिए सभी प्रकार के प्रेक्षणात्‍मक उपकरणों से लैस मोबाइल प्रयोगशाला सुविधा का विकास करना ।
  9. विद्यमान फ्री फॉल-टूयूब के नवीकरण का प्रस्‍ताव है और गरज के साथ तूफान की सूक्ष्‍म भौतिकी और इलेक्‍ट्रिकल विशेषताओं के बीच परस्‍परक्रिया के अध्‍ययन हेतु उप-मिलीमीटर बूदों के उत्‍पादन और विविक्‍ता के लिए कुछ नई सुविधाएं शामिल की जाएगी ।
  10. वायुमंडलीय और जलवायु प्रभावों से संबंधित छोटे परिवर्तनों को प्रवर्धित कराने के लिए भौतिक क्रियाविधि उपलब्‍ध करवाने के लिए वैश्‍विक इलेक्‍ट्रिकल परिवर्तनों की महत्‍तता का आकलन किया जाएगा ।
  11. लाइटिंग चैनल के पुननिर्माण और गरज के साथ तूफान के चार्ज वितरण का अध्‍ययन करने के लिए एक 3 डी लाइटिंग मनचित्र एरे को डिजाइन और फैब्रीकेटिड किया जाएगा ।
  12. सीमा परत उत्‍पत्‍ति पर भू सतह प्रक्रियाओं की भूमिका का अध्‍ययन करना ।
  13. भारतीय क्षेत्र के लिए बढ़ाए गए आकार वाले एक क्षेत्रीय रसायन-विज्ञान परिवहन मॉडल का उपयोग व्‍याख्‍यात्‍मक उद्देश्‍य के लिए किया जाएगा ।
  14. इंडो- गंगेटिक प्‍लेन के विशेष संदर्भ के साथ भारत के ऊपर ब्‍लैक कॉर्बन और वायु प्रदूषकों में क्षोभमंडलीय ऊर्ध्‍वाधर वितरण और ऋतुकालिक परिवर्तनीयता की मॉनीटरिंग ।
  15. 3-डी सामान्‍य परिसंचरण मॉडल का उपयोग करते हुए मध्‍य वायुमंडल में ओजोन और अन्‍य जलवायु प्रणोदन पैरामीटरों में आए दीर्घ अवधि परिवर्तनों (मानव जनित और प्राकृतिक परिवर्तनीयताओं) का अध्‍ययन । साथ ही मध्‍य वायुमंडलीय जलवायु और नौ-चालन प्रणाली पर जीएचजी प्रणोदन के प्रभाव का अध्‍ययन करना ।
  16. भंडारण तथा आवश्‍यक अवसंरचना के साथ आईआईटीएम की विद्यमान उच्‍च कार्य निष्‍पादन कम्‍प्‍यूटर प्रणाली का उन्‍नयन करना ।

(घ) डेलीविरेबल्‍स :

  1. 3 माह के अग्रणी समय के साथ ऋतुकालिक मध्‍य मानसून का उन्‍नत पूर्वानुमान कौशल ।
  2. 20 दिनों के अग्रणी समय के साथ ग्रीष्‍म मानसून के सक्रिय/प्रारंभ चक्रों का उन्‍नत पूर्वानुमान कौशल ।
  3. एनसीईपी युग्‍मित मॉडल आधारित नाम के सीएफएस एक भारतीय गतिशील मॉडल का निर्माण ।
  4. मानसून के ‘आंतरिक’ आईएवी के लिए उत्‍तरदायी भौतिक प्रक्रियाओं को स्‍पष्‍ट करना ।
  5. विशेष रूप से पूर्ववर्ती कुछ शताब्‍दियों के लिए भारत में विश्‍वसनीय उच्‍च–विभेदन प्रॉक्‍सी जलवायु डेटा बेस का निर्माण करना ।
  6. पृथ्‍वी के पर्यावरण में भौतिक रसायन, विकिरण, गतिशील और जैविक परिघटना के बीच विद्यमान युग्‍मित प्रक्रियाओं को समझना तथा मौसम/जलवायु, जल वैज्ञानिक चक्र और पर्यावरणीय प्रदूषण की मॉडलिंग, संवेदनशीलता और अनुरुपण अध्‍ययनों के लिए बहुमूल्‍य इनपुट सूचना उपलब्‍ध करवाना । इन अध्‍ययनों का उष्‍णकटिबंध के लिए विशेष महत्‍व है, जहां उच्‍च तुंगता गरज के साथ तूफान से संबंधित संवहनी और गतिशील प्रक्रियाएं, ऐरोसोल और गैसों के ऊर्ध्‍वाधर वितरण को अत्‍यधिक प्रभावित करती है ।
  7. पुणे के आसपास एक स्‍वचालित मौसम स्‍टेशन नेटवर्क को स्‍थापित करते हुए गरज के साथ तूफान के निर्माण और इसकी तीव्रता का पूर्वानुमान । लाइटनिंग चैनल के पुनर्निर्माण और गरज के साथ तूफान के चार्ज वितरण का अध्‍ययन करने के लिए एक 3 डी लाइटनिंग मानचित्रण एरे को डिजाइन और फैब्रीकेट करना ।
  8. वायुयान के लिए उच्‍च प्रतिक्रिया समय प्रौद्योगिकी विकास के साथ वायुयान का उपयोग करते हुए रासायनिक घटकों से विकिरण प्रणोदन को समझने के लिए इंडो-गंगेटिक प्‍लेन के विशेष संदर्भ के साथ भारत के ऊपर ब्‍लैक कार्बन और वायु प्रदूषकों में क्षोभमंडलीय ऊर्ध्‍वाधर वितरण और ऋतुकालिक परिवर्तनीयता की मॉनीटरिंग । इससे रासायनिक जलवायु विकिरण प्रणोदन मॉडल (सीसीआरएम) का वैधीकरण करने और भारतीय क्षेत्र में विकिरण प्रणोदन की गणना को सुसाध्‍य बनाने में भी मदद मिलेगी ।

(ड.) बजट आवश्‍यकता: रू. 200 करोड़

(रू. करोड़ में)

बजट आवश्‍यकता
स्‍कीम का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
लघु अवधि जलवायु पूर्वानुमान 55.00 45.00 35.00 34.00 31.00 200.00

 

Last Updated On 02/19/2015 - 11:43
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