दक्षिणी महासागर

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दक्षिणी महासागर क्षेत्र में भारत की अनुसंधान गतिविधियों हेतु कार्यक्रम मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति दक्षिणी महासागर क्षेत्र की संवेदनशीलता और वैश्विक पर्यावरण को समझने में इसके महत्व को रेखांकित करता है। इसके अनुसरण में, एमओईएस की ओर से एनसीएओआर ने, जनवरी-मार्च 2004 के दौरान दक्षिणी महासागर के हिंद महासागर क्षेत्र के लिए एक बहु विधात्‍मक और बहु संस्थागत प्रारंभिक अभियान आयोजित करने में प्रमुख भूमिका निभाई है। इस प्रारंभिक अभियान के दौरान शुरू किए गए अध्‍ययनों को जारी रखते हुए जनवरी – मार्च 2006 के दौरान किराए पर लिए गए रुसी अनुसंधान जलयान ‘‘अकादमिक बो‍रिस पेत्रोव’’ जहाज पर लार्समेन पर्वत स्थित नए भारतीय बेस के लिए विशेष अभियान के भाग के रूप में दक्षिण महासागर में अन्‍य बहु विधात्‍मक प्रयास प्रारंभ किए गए।

इन दोनों प्रारंभिक प्रयासों की सफलता ने मंत्रालय को दक्षिणी महासागर के हिंद महासागर क्षेत्र में बहु विधात्‍मक और बहु संस्‍थागत वैज्ञानिक कार्यक्रमों की योजना, समन्‍वय और कार्यान्‍वयन के लिए एक प्रमुख राष्‍ट्रीय पहल शुरू करने के लिए प्रेरित किया। अब तक, पांच ऐसे अभियानों को सफलतापूर्वक (दो प्रारंभिक प्रयासों सहित) शुरू किया गया है। कई राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों जैसे कि आईएमडी, आईआईटीएम, एसपीएल, आईआईएससी, एनआईओ-कोच्चि, एफएसआई, सीएमएफआरआई, सैक पीआरएल, एनएचओ, केबीसीएओएस, सीएमएलआरई, एनआईओटी, और एनसीएओआर और जेएनयू, अन्नामलाई, गोवा, सीयूएसएटी, कर्नाटक और गुजरात जैसे विश्वविद्यालयों ने अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

क) उद्देश्‍य :

  1. दक्षिणी महासागर की गतिशीलता जैसे कि, धारा संरचना और परिवर्तनशीलता; अंटार्कटिक परिस्थितियों में ध्रुवीय धारा की अंतर वार्षिक और अंतर-वार्षिक परिवर्तनशीलता और सतह धाराएं; जियोस्‍ट्रोफिक धाराएं; थर्मोहेलिन परिसंचरण; पानी की सामूहिक संरचना; मिश्रण प्रक्रिया; मेसोस्केल विक्षोभ को समझना।
  2. दक्षिणी महासागर में कार्बन, नाइट्रोजन, सिलिका और लोहे के जैव रासायनिक फ्लक्‍स और ट्रॉफिक संबंधी संरचना पर इसके प्रभाव।
  3. कारकों और प्रक्रियाओं का दस्तावेज़ बनाना जो बायोजेनिक सामग्री का निर्धारण और प्राथमिक उत्पादकता की परिवर्तनशीलता को विनियमित करते हैं।
  4. विगत जलवायु और समुद्रीय परिवर्तनशीलता।
  5. 'आयरन सीमा परिकल्पना' का पुनर्मूल्यांकन और सीओ 2 फ्लक्‍सों के संबंध में बायोजेनिक प्रक्रियाओं की मध्यस्थता में लोहे की भूमिका पर एक व्यापक अध्ययन
  6. दक्षिणी महासागर कार्बन प्रक्रिया।
  7. दक्षिणी महासागर से प्राप्‍त तलछटों पर विस्तृत समस्थानिक, रासायनिक माइक्रोप्‍लेंटोलॉजिक अध्ययन करना और विगत जलवायु परिवर्तन के प्रति उनकी प्रतिक्रिया और फीडबैक को समझना।
  8. तटीय अंटार्कटिका की हाइड्रोडायनेमिक्‍स।

ख) प्रतिभागी संस्‍थाएं :

राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केन्द्र, गोवा

ग) कार्यान्‍वयन योजनाएं :

मंत्रालय की ओर से एनसीएओआर द्वारा दक्षिणी महासागर क्षेत्र में बहु संस्थागत भारतीय वैज्ञानिक प्रयास से संबंधित वैज्ञानिक और सभारतंत्र संबंधित पहलुओं से संबंधित योजना, समन्‍वय और कार्यान्‍वयन के सभी पहलुओं पर कार्य किया जाएगा।

विश्वविद्यालयों, सर्वेक्षण संगठन और समुद्र विज्ञान के अध्ययन में शामिल अन्य संस्थानों से प्रस्तावों को आमंत्रित किया जाएगा और फिर अभियान के विषय के अनुसार चुने गए प्रस्‍ताव के सभी पहलुओं की जांच एक विशेषज्ञ समूह द्वारा की जाएगी।

घ) वितरण योग्‍य :

दक्षिणी महासागर क्षेत्र में वैज्ञानिक अध्ययन के बहु संस्थागत राष्ट्रीय मिशन से एक संपूर्ण डेटाबेस की प्राप्‍ति होगी जो के दक्षिणी महासागर की गतिशीलता कार्बन के जैव भूरासायनिक फ्लक्‍स, नाइट्रोजन, सिलिका और लोहे और पोषण संरचना पर उनके प्रभाव, वैश्विक जलवायु आदि के नियमन में दक्षिणी महासागर की भूमिका से संबंधित अभी तक अनुत्तरित प्रश्नों में से कई पर प्रकाश डाल सकता है।

ङ) बजट की आवश्‍यकता : 87 करोड़ रुपए

(करोड़ रु. में)

बजट आवश्‍यकता
योजना का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
दक्षिणी महासागर 16.00 22.00 15.00 20.00 14.00 87.00

 

Last Updated On 06/19/2015 - 11:47
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