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तकनीकी क्राइटीरिया एटलस

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चयनित स्थानों पर अवलोकनों का उपयोग करते हुए और संख्यात्मक सिमुलेशन के साथ मॉडलिंग द्वारा तटरेखा लाक्षणीकरण के उद्देश्य के साथ तकनीकी मानदंड एटलस कार्यक्रम तैयार किया गया था।  11 वीं योजना में विभिन्न वापसी की अवधि के साथ चरम आँकड़ों जैसे इंजीनियरिंग मापदंडों के डेटाबेस / एटलस तैयार करने के लिए घटकों (ज्वार, लहर और धाराओं) का अध्ययन प्रारंभ किया गया और हमारे क्षेत्रों के लिए एटलस को पूरा करने के लिए इसे 12 वीं योजना अवधि में जारी रखने का प्रस्ताव है।

क) उद्देश्‍य :

भारत के तट के साथ तटीय बुनियादी ढांचे में इंजीनियरिंग डिजाइन और तटीय सुरक्षा के लिए एक संदर्भ को विकसित करना और 10 स्‍थानों पर 5,10, 25, 50 और 100 वर्षों की विभिन्‍न वापसी अवधियों के लिए लहरों, धाराओं और जल स्‍तर के रूप में हाइड्रो गतिशील भार के मौसमी चरम मूल्य के अनुमान प्रदान करना।

ख) प्रतिभागी संस्‍थाएं :

राष्ट्रीय समुद्री प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै।

ग) कार्यान्‍वयन योजनाएं :

दीर्घ अवधि उथले जल तरंग और मौसम महासागर अवलोकन के साथ आठ स्टेशन कवर किए जाएंगे।

मौजूदा तटीय प्रतिष्ठानों जैसे बंदरगाहों, बिजली संयंत्रों और उद्योगों का इस्तेमाल निरंतर अवलोकन के लिए किया जाएगा। ऐसी एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए पारस्परिक लाभ के लिए स्थानीय भागीदारी के साथ अवलोकन कवरेज में सुधार करने के लिए व्यवस्था की जाएगी।

तटीय इंजीनियरिंग समुदाय के उपयोग और भावी संशोधन के लिए टीसीए में डेटा को फीड करने के लिए वर्तमान में देश में प्रचालित ज्वार मापी नेटवर्क, एचएफ रडार, पोर्ट निगरानी प्रणाली, लियो अवलोकन, आदि जैसी विभिन्न अवलोकन योजनाओं के माध्यम से डेटा को एकीकृत करने के प्रयासों की शुरूआत की जाएगी।

कार्यक्रम एनआईओटी द्वारा लागू किया जाएगा। स्थानीय शैक्षिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और एनआईटी को संख्यात्मक मॉडलिंग का संचालन और स्‍थल पर माप लेने में शामिल किया जाएगा। परियोजना में अनुसंधान शिक्षाविदों / छात्रों को शामिल किया जाएगा। आईएमडी, इंकॉइस, सैक आदि के पास उपलब्ध माध्यमिक जानकारी प्राप्त की जाएगी। कार्यान्वयन में शामिल प्रमुख कदम हैं :

फील्‍ड डेटा (ज्वार, लहर और धाराओं) के साथ हाइड्रोडाइनमिक मॉडलिंग और सत्‍यापन तथा एटलस के लिए विभिन्न मापदंडों की संगणना।

वेब आधारित एटलस के लिए सॉफ्टवेयर विकास।

तट आधारित वेधशालाओं को स्थापित करने के लिए (बंदरगाहों, तटीय विद्युत संयंत्रों, आदि) स्थानीय एजेंसियों की व्यवस्था और टीसीए में समय-समय पर सुधार के लिए डेटा फ़ीड करना।

परियोजना मॉड्यूल के अलावा, इकमाम के साथ समन्वय में समुद्र का स्तर बढ़ने का आकलन के लिए द्वीप समूह में समुद्र तट स्थिरता से संबंधित अध्ययन किया जाएगा। इसमें एक समान कार्य योजना बनाने का प्रस्ताव दिया गया है जिसमें इकमाम और एनआईओटी दोनों के संयुक्त प्रयासों के साथ अंतिम उत्पाद प्राप्त करने के लिए एक कार्यनीति भी बनाई जाए। यह भी प्रस्ताव है कि कार्य के प्रवाह के साथ-साथ डेटा संग्रह और प्रारूपों के लिए आम गुणवत्ता प्रक्रिया का समन्वय करने के लिए कार्य समूह बनाया जाए।

बुनियादी सुविधाएं / प्रयोगशाला आवश्यकताएं

भारत में उपलब्ध तटीय इंजीनियरिंग सुविधाएं कुछ केंद्रों पर सीमित हैं जैसे आईआईटी और सीडब्‍ल्‍यूपीआरएस और इन सुविधाओं में उथला जल परीक्षण की सुविधा शामिल नहीं है। वर्तमान अनुसंधान में निकट तट / लहर तोड़ने वाले क्षेत्र की अधिक जांच किए जाने की जरूरत है। अनुसंधान के क्षेत्रों में संरचनाओं पर लहर भार, तट के निकट लहर में परिवर्तन, तलछट परिवहन अध्ययन का आकलन शामिल है। उपरोक्‍त अनुसंधान के लिए निम्‍न सुविधाओं की आवश्‍यकता इस प्रकार से है:

एक खुला तट घाट, जमीन से 8 मीटर की पानी की गहराई तक में, तटीय इंजीनियरिंग रिसर्च की सुविधा के साथ-साथ इंस्ट्रूमेंटेशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

तलछट परिवहन के लिए एक बड़े पैमाने पर प्रयोगशाला

सभी परीक्षण उपकरणों और सुविधाओं के साथ एक भवन।

घ) वितरण योग्‍य :

  1. भारतीय समुद्रों के लिए लहरों, धाराओं और ज्वार के लिए एक एटलस।

ङ) बजट की आवश्‍यकता : 36 करोड़ रुपए

(करोड़ रु)

बजट आवश्‍यकता
योजना का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
तकनीकी मानदंड एटलस 13 8 6 5 4 36

 

Last Updated On 06/19/2015 - 12:34
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