जलवायु परिवर्तन और जलवायु में भिन्नता के कारण वैश्विक तापन के वर्तमान संदर्भ में इस बात का बहुत अधिक महत्व है कि पिछले समय में क्या हुआ है, ताकि भविष्य में एक बेहतर तरीके से जलवायु के भावी रुझान का आकलन करते हुए मॉडलर, नीति योजनाकारों और अर्थशास्त्रियों को जवलायु से जुड़ी किसी भावी आपदा की पहले से तैयारी करने में मदद दी जा सके। एसआईबीईआर और जीयोट्रेसिस कार्यक्रम के विस्तार के तौर पर विभिन्न भू गर्भीय क्षेत्रों से पेलियोक्लाइमेटिक पुन: निर्माण के प्रयोजन से उपयोग हेतु अनेक प्रोक्सी बनने की उम्मीद है और यह पिछले 10,000 वर्षों से बीपी से क्वार्टनरी अवधि और उसके परे तक के समय पैमाने तक भिन्न होती है। अत: प्रस्तावित है कि विभिन्न प्रोक्सी का उपयोग करते हुए पेलियोक्लाइमेटिक पुन: निर्माण नामक नए विज्ञान घटक को आरंभ किया जाए। पेलियोक्लाइमेटिक पुन: निर्माण के संदर्भ में एक व्यापक और समावेशी विज्ञान घटक तैयार करने के लिए अनेक उपागम / डेटा / प्रोक्सी का उपयोग किया जाएगा।
उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, देश भर से विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं के जरिए पेलियोक्लाइमेटिक पुन: निर्माण में विशेषज्ञता रखने वाले व्यक्तियों को लेकर संस्थानों के साथ 95.00 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत पर विभिन्न प्रोक्सी का उपयोग किया जाएगा। अनुमानित आकलन का वर्ष वार विवरण इस प्रकार हैं।
क्वाटर्नरी के दौरान पिछले मानसून (पेलियो मानसून) की भिन्नता पर भारत के अनेक संस्थानों और वैज्ञानिकों ने सक्रिय अध्ययन किए हैं। जबकि इनमें से अधिकांश प्रयास डेटा घनत्व, डेटा गुणवत्ता, प्रोक्सी सत्यापन और कालक्रम की सीमाओं के साथ उपक्रांतिक स्तर पर किए गए हैं। जबकि हाल में किए गए संश्लेषण से स्पष्ट रूप से संकेत मिलता है कि कालक्रम और प्रोक्सी प्रत्युत्तर की उचित समझ के साथ कठिनाइयों के मामले में विशाल और विभिन्न डेटा सेट की प्रत्यक्ष तुलना होती है। पुन:, अब तक किए गए सामान्य भू रूपों को तलछट उत्पादन को उचित रूप से समझे बिना जलवायु के साथ सह संबंधित किया गया है। इनसे प्रतिक्रिया समय में कमी आती है जो स्थलों तथा तलछट निर्माण को नियंत्रित करने वाले पैरामीटरों पर निर्भर करता है। इस प्रकार एक सुरक्षित और उचित रूप से अंशांकित डेटा बेस बनाने पर अधिक बल नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इससे केवल भारतीय जलवायु प्रणाली की प्राकृतिक भिन्नता का अनुमान मिलता है जो नीति निर्धारण और क्षेत्रीय विकास परिदृश्य दोनों के लिए जरूरी है। संक्षिप्त उद्देश्य निम्नानुसार दिए गए हैं:
उच्च विभेदन उप सतही स्ट्रेटिग्राफी, कोर रेजिंग तथा तलछट की विशेषताओं पर पेलियोक्लाइमेटिक डेटा बेस तैयार करना, माइक्रोफोना और फ्लोरा, भूरसायन, स्थिर आइसोटोप, क्रोनोलॉजी, भूमि के इस भाग में मानव व्यवसाय पर तटीय रेखा के विस्थापन का प्रभाव।
(करोड़ रु. में)
| योजना का नाम | 2012-13 | 2013-14 | 2014-15 | 2015-16 | 2016-17 | कुल |
|---|---|---|---|---|---|---|
| पुरा जलवायु परिस्थितियों का पुनर्निर्माण (नवीन) | 25.00 | 20.00 | 20.00 | 15.00 | 15.00 | 95.00 |